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३९ फीसदी मतदाता सूची से गायब!..चुनाव आयोग से सवाल…मुंबादेवी में वोटों पर किसका वार?

सामना संवाददाता / मुंबई
चुनाव लोकतंत्र का उत्सव है, लेकिन अगर मतदाता का नाम ही मतदाता सूची से गायब हो जाए तो वह अपने अधिकार का इस्तेमाल कैसे करेगा? मुंबई के मुंबादेवी विधानसभा क्षेत्र में मसौदा मतदाता सूची से ३९ प्रतिशत मतदाताओं के नाम बाहर होने का दावा कांग्रेस विधायक अमीन पटेल ने किया है। इस दावे ने मतदाता सूची की शुद्धता और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नाम कटे तो जवाबदेह कौन?
अमीन पटेल के दावे को सही मानकर सीधे निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी, लेकिन इसे नजरअंदाज करना भी उचित नहीं। यदि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची में नहीं हैं, तो चुनाव अधिकारियों को स्पष्ट करना चाहिए कि ऐसा क्यों हुआ। कितने नाम मृत मतदाताओं के हैं, कितने लोगों के पते बदले हैं और कितने जीवित, पात्र नागरिकों के नाम गलती से हटे हैं। इन सवालों के जवाब सार्वजनिक होने चाहिए।
चुनाव आयोग दे पारदर्शी जवाब
अब असली कसौटी यह है कि प्रशासन इस दावे की स्वतंत्र जांच कराता है या नहीं। ३९ प्रतिशत का आंकड़ा किस आधार पर सामने आया, इसकी आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
सिर्फ आंकड़े नहीं, नागरिकों के अधिकार का सवाल
मतदाता सूची में त्रुटि महज कागजी गलती नहीं है। किसी पात्र नागरिक का नाम छूटने पर उसका मतदान का अधिकार प्रभावित हो सकता है। इसलिए चुनाव आयोग और स्थानीय निर्वाचन अधिकारियों को क्षेत्रवार आंकड़े, नाम हटाने के कारण और आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया स्पष्ट करनी चाहिए। प्रभावित नागरिकों को नाम जांचने और निर्धारित समय में सुधार कराने की सुविधा भी मिलनी चाहिए।
कांग्रेस विधायक अमीन पटेल का दावा, मसौदा मतदाता सूची ने बढ़ाई चिंता; लोकतंत्र में मतदाता ही गायब हुए तो चुनाव की विश्वसनीयता कौन बचाएगा?

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