-विकास की कीमत पानी, बिजली और हरियाली?
सामना संवाददाता / मुंबई
ठाणे के बालकुम में अमेजन के डेटा सेंटर को लेकर विकास और स्थानीय सुविधाओं के बीच टकराव सामने आया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एक हजार से अधिक निवासियों का कहना है कि परियोजना पर स्थानीय लोगों से सार्थक चर्चा किए बिना आगे बढ़ा गया। उनका डर है कि विशाल केंद्र से बिजली-पानी की मांग बढ़ेगी, शोर स्वास्थ्य पर असर डालेगा और हरित क्षेत्र घटेगा। रिपोर्ट के अनुसार, निर्माण के लिए पेड़ काटे गए हैं और परियोजना स्थल घरों के पास है।
अमेजन का कहना है कि डेटा सेंटर को घरों और दुकानों से अलग, समर्पित बिजली आपूर्ति मिलेगी; सर्वर ठंडे रखने के लिए पानी का इस्तेमाल नहीं होगा और शोर कम करने के उपाय किए जाएंगे। कंपनी ने यह भी कहा है कि हटाए गए पेड़ों से ज्यादा पौधे लगाए गए हैं। हालांकि, पानी रहित शीतलन का दावा पूरे परिसर में पानी की खपत शून्य होने का अर्थ नहीं है। पानी का उपयोग अन्य जरूरतों के लिए होगा। एआई और डिजिटल सेवाओं के लिए डेटा सेंटर जरूरी बुनियादी ढांचा हैं, लेकिन उनका बोझ स्थानीय बस्तियों पर नहीं पड़ना चाहिए। परियोजना की बिजली, पानी, शोर और पर्यावरण संबंधी निगरानी के आंकड़े सार्वजनिक हों। तभी विकास के दावे पर भरोसा बनेगा।
बालकुम में अमेजन के प्रस्तावित डेटा सेंटर को लेकर एक हजार से अधिक स्थानीय निवासियों ने आपत्ति जताई है। उन्हें बिजली-पानी पर दबाव, शोर और पेड़ों की कटाई की चिंता है। कंपनी का कहना है कि केंद्र के लिए अलग बिजली आपूर्ति और बिना पानी वाली शीतलन तकनीक होगी।
