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बंगाल उपचुनाव में भाजपा की दोहरी जीत…‘एसआईआर’ और वोटों के अंतर पर उठे सवाल!

सामना संवाददाता / कोलकाता
पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में भाजपा ने बड़ी जीत हासिल की। नंदीग्राम में पार्टी उम्मीदवार हासिरानी रथ ने कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को १,२२,७५३ वोटों से हराया। रेजीनगर में भाजपा के शुभेंदु सरकार ने आम जनता उन्नयन पार्टी के गुलाम नबी आजाद को ७५ हजार से अधिक वोटों के अंतर से पराजित किया। इस सीट पर तृणमूल और कांग्रेस के उम्मीदवार भी मैदान में थे।
इन नतीजों पर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं कि रेजीनगर मुस्लिम-बहुल निर्वाचन क्षेत्र है और बंगाल में एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने को लेकर पहले से विवाद है। लेकिन उपचुनाव का नतीजा अपने-आप में एसआईआर में गड़बड़ी या किसी खास अधिकारी की भूमिका का सबूत नहीं है। मतदाता सूची में बदलाव और मतदान के रुझान पर निष्पक्ष जांच तथा बूथवार आंकड़ों के बिना कोई निर्णायक निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। ताज्जुब की बात तो यह है कि जहां देश भर में भाजपा के खिलाफ आक्रोश है, भारतीय जनता पार्टी की लोकप्रियता दिन प्रति दिन घटती जा रही है, २०२४ के लोकसभा चुनाव में जिसकी साफ तस्वीर भी जनता के सामने आ चुकी थी, तमाम प्रयासों और मैनिपुलेशन के बाद भी भाजपा बहुमत के आंकड़े को छू नहीं पाई थी, उस दौर में कोई ऐसी मुस्लिम बहुल सीट हों जहां पर ममता और कांग्रेस के संयुक्त उम्मीदवार को भाजपा से हार मिल जाती है, यह या तो ज्ञानेश कुमार का कमाल हो सकता है या फिर ऊपर वाले का चमत्कार।
यूपी में वोट काटने का खेल? ८५,८५४ फॉर्म में कारण ही गायब!
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान ८५,८५४ फॉर्म में नाम हटाने का कारण दर्ज नहीं होने का दावा सामने आया है। ‘द रिपोर्टर्स कलेक्टिव’ की ९ अक्टूबर २०२६ को प्रकाशित पड़ताल के अनुसार, चुनाव अधिकारियों की ओर से दाखिल ८७,१२७ फॉर्म में से ९८.५ प्रतिशत में कारण का उल्लेख नहीं था। रिपोर्ट में चुनाव आयोग के ईआरओनेट सॉफ्टवेयर द्वारा फॉर्म अपने आप तैयार किए जाने और उन पर अधिकारियों के डिजिटल हस्ताक्षर होने की बात भी कही गई है। हालांकि, यह पड़ताल में सामने आया दावा है; चुनाव आयोग का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट होगी।

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