मुख्यपृष्ठनए समाचारमनपा का खोखला दावा!..१० साल बाद भी मुंबई की सीवर व्यवस्था लाचार

मनपा का खोखला दावा!..१० साल बाद भी मुंबई की सीवर व्यवस्था लाचार

-९ फीसदी काम पूरा होने के पुराने दावों की हवा निकली

द्रुप्ति झा / मुंबई
मनपा की ढुलमुल कार्यशैली और खोखले वादों का खामियाजा आज भी मुंबई की जनता भुगत रही है। प्रशासन ने वर्ष २०१६ में बड़े जोर-शोर से ढिंढोरा पीटा था कि बोरीवली (डॉन बॉस्को जंक्शन) से मालाड तक बनने वाली ५.८ किलोमीटर लंबी मुख्य सीवर सुरंग (चरण-१) का ९० प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और जुलाई २०१७ तक पूरी परियोजना चालू कर दी जाएगी। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि कागजी दावों और ब्रेक-थ्रू के नाम पर वाहवाही लूटने वाला प्रशासन वर्षों बीत जाने के बाद भी जल प्रदूषण और सीवर ओवरफ्लो की समस्या से मुंबईकरों को निजात नहीं दिला सका है। ५.८ किलोमीटर लंबी सुरंग, १,१८२ मिलियन लीटर प्रति दिन क्षमता और करोड़ों रुपये के बजट का ढोल पीटने वाले अधिकारी यह बताने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं कि आखिर पश्चिमी उपनगरों दहिसर, बोरीवली, कांदिवली और मलाड के नागरिकों को आज भी बदबूदार सीवर और दूषित पानी का सामना क्यों करना पड़ रहा है?
सीवेज ट्रीटमेंट और स्वच्छ पर्यावरण के नाम पर करोड़ों रुपये पानी में बहा दिए गए, लेकिन न तो गोराई और चारकोप जैसे इलाकों की नालियों का ओवरफ्लो रुका और न ही समुद्र में मिलने वाले गंदे पानी का प्रदूषण कम हुआ।
जनता को सिर्फ सपने दिखाए गए
पंपिंग स्टेशनों के रखरखाव में बचत और क्षमता बढ़ाने के बड़े-बड़े आंकड़े पेश करके जनता को सिर्फ सपने दिखाए गए। मनपा प्रशासन के इन अधूरे वादों और सुस्त रफ्तार ने यह साबित कर दिया है कि परियोजनाओं के समय पर पूरा होने के दावे केवल विज्ञापनों और फाइलों तक ही सीमित रहते हैं, जबकि मुंबईकर आज भी सीवर की अव्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही झेलने को मजबूर हैं।

 

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