सामना संवाददाता / मुंबई
घर में नहीं दाने, अम्मा चली भुनाने! यही कहावत इन दिनों महाराष्ट्र सरकार के पैâसले पर सटीक बैठती है। राज्य के खजाने की हालत ठन-ठन गोपाल है, कर्जे पर कर्जा लेकर जैसे-तैसे विकास कार्यों और योजनाओं की गाड़ी खींची जा रही है। लेकिन इस आर्थिक तंगी के बीच सरकार का `शाही अंदाज’ कम होने का नाम नहीं ले रहा। अब खबर आई है कि राज अतिथियों यानी वीआईपी की खातिरदारी के लिए सरकार करोड़ों रुपए की नई-नवेली लग्जरी गाड़ियां खरीदने जा रही है।
हाल ही में राज्य के राजशिष्टाचार विभाग ने ४४ नए वाहनों की खरीद के लिए १२ करोड़ ६८ लाख ६४ हजार रुपए के बजट को प्रशासनिक मंजूरी दी है। इस नए बेड़े का सबसे बड़ा आकर्षण ४.०७ करोड़ रुपए की बुलेटप्रूफ `टोयोटा लैंड क्रूजर ३००’ है। इसके अलावा, मेहमानों के स्वागत में ३२ टोयोटा इनोवा क्रिस्टा (लगभग ६.८० करोड़ रुपए), २ टोयोटा फॉर्च्यूनर (६० लाख रुपए), ७ मारुति एर्टिगा और एक लग्जरी बस भी शामिल की जा रही है।
सरकार की दलील है कि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों और अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों जैसे विशिष्ट अतिथियों के लिए पुराने वाहन अब सेवा योग्य नहीं रहे। इसलिए सुरक्षा और सुविधा के लिहाज से केंद्र के जीईएम पोर्टल के जरिए ये गाड़ियां खरीदी जाएंगी।
खजाना खाली, शाही ठाठ जारी!
सवाल यह उठता है कि जब राज्य की आर्थिक सेहत खुद `वेंटीलेटर’ पर हो, तब ऐसी फिजूलखर्ची कितनी जायज है? एक तरफ आम जनता से जुड़ी कल्याणकारी योजनाओं के लिए बजट का रोना रोया जाता है, तो दूसरी तरफ वीआईपी मेहमानों के स्वागत में करोड़ों का चूना खजाने को लगाया जा रहा है।
