– न सड़क पर गुंडे, न आमने-सामने की धमकी
– सोशल मीडिया बना वसूली का हथियार
फिरोज खान / मुंबई
मुंबई में अब रंगदारी वसूलने के लिए गुंडों को सड़क पर उतरने या आमने-सामने आने की जरूरत नहीं है। इतना ही नहीं रेकी करने के लिए किराए के छोकरे लेने की भी जरूरत नहीं है। साइबर अपराधी अब सोशल मीडिया पर ही रेकी करने लगे हैं। सोशल मीडिया पर लोगों की निजी जानकारी जुटाई जाती है, परिवार और कारोबार के बारे में मालूम किया जाता है। यहां तक के आर्थिक स्थिति और बैंक बैलेंस तक पता कर लिया जाता है, फिर फोन या मैसेज से धमकाकर पैसे वसूली का धंधा शुरू करते हैं। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, साइबर अपराधियों ने एक्सटॉर्शन का ऐसा डिजिटल जाल बिछाया है, जिसमें आम नागरिकों से लेकर कारोबारी तक निशाने पर हैं। बुजुर्ग, रिटायर्ड कर्मचारियों की संख्या ज्यादा है। आश्चर्य की बात यह है कि तकनीक के इस दौर में मुंबई पुलिस खटारा सिस्टम के भरोसे बैठी है, जबकि साइबर क्रिमिनल हर रोज नई टेक्नोलॉजी को अपना रहे हैं। अपराधी सोशल मीडिया पोस्ट और तस्वीरों के जरिए लोगों के परिवार, आर्थिक स्थिति, रहने के ठिकाने और दिनचर्या की जानकारी जुटाते हैं। इसके बाद फर्जी प्रोफाइल, अंतर्राष्ट्रीय नंबरों और डिजिटल धमकियों के जरिए वसूली की जाती है।
खाताधारक कोई और, अपराधी कोई और
इस खेल में खासकर ‘मनी म्यूल’ बैंक खातों का इस्तेमाल किया जाता है। यानी अपराध से वसूली गई रकम पहले किसी दूसरे व्यक्ति के खाते में जमा होती है और फिर कई खातों में घुमाकर निकाल ली जाती है। इससे असली अपराधियों तक पहुंचना जांच एजेंसियों के लिए मुश्किल हो जाता है। ऑनलाइन लोन ऐप के जरिए मोबाइल की जानकारी हासिल कर पीड़ितों और उनके परिवारों को धमकाने के मामले भी सामने आए हैं।
