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डॉक्टरों के भविष्य से खिलवाड़, कुंभकर्णी नींद में प्रशासन!

-वर्षों से मेडिकल रजिस्ट्रेशन के लिए भटक रहे ३५० डॉक्टर
-प्रतिनिधिमंडल की गुहार के बाद भी समाधान का इंतजार

सामना संवाददाता / मुंबई

महाराष्ट्र में स्वास्थ्य प्रणाली की घोर लापरवाही और प्रशासनिक सुस्ती का एक और खौफनाक चेहरा सामने आया है। राज्य के लगभग ३५० डॉक्टर पिछले कई महीनों और वर्षों से अपने वैध मेडिकल रजिस्ट्रेशन (चिकित्सा पंजीकरण) के लिए अधिकारियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। स्थिति इतनी बदतर है कि कई होनहार डॉक्टरों के आवेदन पिछले तीन सालों से धूल फांक रहे हैं। इस प्रशासनिक नाकामी के चलते अब इन युवा डॉक्टरों का भविष्य अंधकार में डूबता नजर आ रहा है और उनके परीक्षा परिणामों के रोके जाने व शैक्षणिक प्रगति बाधित होने की गंभीर आशंका पैदा हो गई है।
भविष्य के साथ खिलवाड़ और सिस्टम की उदासीनता
यह लचर व्यवस्था केवल कागजी देरी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन डॉक्टरों के करियर पर सीधा प्रहार है, जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी देश और समाज की सेवा के लिए समर्पित करने की ठानी है। समय पर रजिस्ट्रेशन न मिलने के कारण इन डॉक्टरों के पेशेवर जीवन की शुरुआत ही अनिश्चितता और मानसिक प्रताड़ना के साये में हो रही है। खासकर विदेशी मेडिकल स्नातकों को इस व्यवस्था की चक्की में पिसना पड़ रहा है, जिन्हें हर कदम पर अनगिनत बाधाओं और भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है।
सिर्फ कागजी आश्वासनों से नहीं चलेगा काम
हाल ही में सेंट्रल महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स के एक प्रतिनिधिमंडल ने डॉ. अथर्व शिंदे के नेतृत्व में महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल के अध्यक्ष डॉ. संजय कदम से मुलाकात कर एक ज्ञापन सौंपा था। हालांकि, इस तरह की औपचारिकताएं और खोखले आश्वासन इन पीड़ित डॉक्टरों के जख्मों पर मरहम लगाने में पूरी तरह नाकाम साबित हुए हैं।

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