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कागजों पर दौड़ती ड्राइवरलेस बस का सपना!

-विरार में ३.१ किमी एलिवेटेड कॉरिडोर का प्रस्ताव
-५०-७० यात्रियों की क्षमता वाली एजीटी पर विचार

संदीप पांडेय / मुंबई

मुंबई-अमदाबाद बुलेट ट्रेन से सफर करने वालों को विरार में ड्राइवरलेस परिवहन की सुविधा देने की योजना सामने आई है। वसई-विरार मनपा (वीवीसीएमसी) बुलेट ट्रेन स्टेशन को नालासोपारा-पश्चिम में प्रस्तावित मेट्रो लाइन-१३ से जोड़ने के लिए ३.१ किलोमीटर लंबे एलिवेटेड ऑटोमेटेड गाइडवे ट्रांजिट (एजीटी) पर विचार कर रही है। लेकिन फिलहाल यह योजना प्रस्ताव के स्तर पर है। न परियोजना को अंतिम मंजूरी मिली है, न निर्माण शुरू होने की तारीख सामने आई है और न ही लागत व पूरा होने की समय सीमा स्पष्ट है।
बुलेट ट्रेन स्टेशन से मेट्रो तक प्रस्तावित कनेक्टिविटी
प्रस्ताव के मुताबिक, एजीटी कॉरिडोर विरार पूर्व के सहकार नगर से शुरू होकर रेलवे पटरियों के ऊपर से गुजरते हुए नालासोपारा पश्चिम में प्रस्तावित मेट्रो लाइन-१३ तक पहुंच सकता है। इस प्रणाली में बिना ड्राइवर चलने वाले स्वचालित वाहन इस्तेमाल करने की योजना है, जिनमें शुरुआती तौर पर ५० से ७० यात्रियों के सफर करने की क्षमता बताई गई है। भविष्य में इस कॉरिडोर को विरार के समुद्र तट की दिशा में बढ़ाने की संभावना भी जताई गई है।
यह योजना बुलेट ट्रेन स्टेशन के आसपास करीब ४६३ हेक्टेयर क्षेत्र के स्थानीय विकास प्रारूप का हिस्सा है। इसके लिए वीवीसीएमसी टंडन अर्बन सॉल्यूशंस और जापानी प्रतिनिधिमंडल के साथ काम कर रही है। आराखड़े का मसौदा नवंबर २०२६ की शुरुआत तक तैयार होने की उम्मीद है, जिसके बाद उसे राज्य सरकार की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
एक ओर बुलेट ट्रेन स्टेशन तक आसान पहुंच का सपना दिखाया जा रहा है, दूसरी ओर प्रस्तावित मेट्रो लाइन-१३ और एजीटी जैसी योजनाओं को मंजूरी से लेकर निर्माण तक का सफर तय करना बाकी है। ऐसे में केवल ड्राइवरलेस तकनीक का आकर्षण दिखाने के बजाय प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि परियोजना कब मंजूर होगी, कितना खर्च आएगा और यात्रियों को इसका लाभ किस समय तक मिल सकेगा। वरना आधुनिक परिवहन का यह सपना भी आराखड़ों और घोषणाओं तक सिमटकर रह सकता है।

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