मुख्यपृष्ठनए समाचारसुप्रीम कोर्ट का आदेश भी बेअसर?..पत्रकारों को घसीटती रही दिल्ली पुलिस

सुप्रीम कोर्ट का आदेश भी बेअसर?..पत्रकारों को घसीटती रही दिल्ली पुलिस

-२० से ज्यादा जर्नलिस्ट्स ने लगाए गंभीर आरोप

सामना संवाददाता / नई दिल्ली

राजधानी दिल्ली में लोकतंत्र की आवाज उठाने वालों के साथ अब खबर दिखाने वाले पत्रकारों पर भी पुलिसिया कार्रवाई के गंभीर आरोप लगे हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मतदाता अधिकारों के मुद्दे पर हो रहे विरोध प्रदर्शनों की कवरेज कर रहे २० से अधिक पत्रकारों ने दिल्ली पुलिस पर मारपीट, जबरन हिरासत, धमकी और वैâमरे-मोबाइल छीनने के आरोप लगाए हैं। सवाल यह है कि जब पत्रकारों को अपना काम करने से रोकने का अधिकार पुलिस को नहीं है, तो फिर प्रेस कार्ड दिखाने के बावजूद उन्हें निशाना क्यों बनाया गया।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, ११ अक्टूबर को जंतर-मंतर और दिल्ली के अन्य इलाकों में प्रदर्शन की रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकारों ने पुलिस की कार्रवाई के भयावह अनुभव साझा किए। आरोप है कि कई पत्रकारों को पुलिस वाहनों में जबरन बैठाया गया, उनके साथ मारपीट की गई और मोबाइल में मौजूद वीडियो तथा तस्वीरें मिटाने का दबाव बनाया गया। कुछ पत्रकारों के वैâमरे, लेंस और अन्य उपकरण क्षतिग्रस्त होने या गायब होने की शिकायतें भी सामने आई हैं।
सबसे गंभीर सवाल यह है कि ११ अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट द्वारा पत्रकारों, वकीलों और अन्य पेशेवरों को उनके कर्तव्यों के निर्वहन से नहीं रोकने की बात कहे जाने के बावजूद ऐसी घटनाओं के आरोप क्यों सामने आए? पत्रकारों का दावा है कि उन्होंने अपनी पहचान और प्रेस कार्ड दिखाकर स्पष्ट किया कि वे केवल रिपोर्टिंग कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद पुलिस ने उनकी बात नहीं सुनी। कुछ को घंटों तक थानों में रखा गया। एक पत्रकार ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने उसे धक्का दिया, कॉलर से खींचा और सिर पर वार किए। उसके मुताबिक, हिरासत के दौरान पेट पर बंदूक की नली और डंडे से दबाव बनाया गया तथा चेहरे पर भी वार किए गए।

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