सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई के बांद्रा बैंड स्टैंड स्थित ग्रंथाली प्रतिभांगण सभागार में किया गया। छह सत्रों में विभाजित काव्य पाठ में हिंदी, मराठी, गुजराती, उर्दू , मैथिली भाषा और ब्रजभाषा, भोजपुरी, गोरमाटी लोकभाषा में विभिन्न कवियों ने काव्य पाठ किया। हर एक सत्र भारतीय साहित्य के उन पुरोधाओं और महान कवियों नारायण सुर्वे, विंदा करंदीकर, कैफ़ी आज़मी, धर्मवीर भारती, अली सरदार जाफरी और रमेश पारिख को समर्पित था, जिनकी लेखनी ने कई पीढ़ियों को वैचारिक और कलात्मक दिशाएँ दी हैं। मुंबई के बैंडस्टैंड समुद्र तट पर स्थित सभागार विभिन्न भारतीय भाषाओं और लोक भाषाओं के कुल 80 प्रतिष्ठित कवि अपनी कविताओं के ज़रिए काव्य प्रेमियों से रूबरू हुए। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध मराठी कवि अरुण शेवते ने की।
इस वर्ष से प्रारंभ किए गए ‘ग्रंथाली सम्मान’ की परंपरा का ऐतिहासिक श्रीगणेश हुआ। प्रत्येक वर्ष यह प्रतिष्ठित सम्मान किसी एक भाषा के उत्कृष्ट कवि को प्रदान किया जाएगा। प्रथम ग्रंथाली कविता मुंबई 2026 सम्मान मराठी के प्रतिभावान कवि महेश लोंढे को प्रदान किया गया। यह सम्मान उन्हें कवि मोहन काले और हृदयेश मयंक के कर-कमलों द्वारा तथा आयोजन समिति की ओर से ग्रंथाली प्रतिभांगण, बैंडस्टैंड, बांद्रा में आदरपूर्वक भेंट किया गया।
साहित्यिक थाती को सहेजने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, ‘कविता मुंबई २०२५’ में पढ़ी गई कविताओं के संकलन (जिसे ‘काव्या पत्रिका’ ने विशेषांक के रूप में प्रकाशित किया है) का भव्य लोकार्पण किया गया। यह लोकार्पण मराठी कवि अरुण शेवते, हिंदी कवि राजेंद्र गौतम, गुजराती कवि दिलीप झवेरी और उर्दू कवि क़मर सिद्दीक़ी के हाथों संपन्न हुआ। इस वर्ष के उत्सव में अपनी उपस्थिति और रचनाधर्मिता से प्राण फूंकने वाले प्रमुख कवि- सादिका नवाब सहर, विनोद दास, अनूप सेठी, सुंदर चंद ठाकुर, हरजिंदर सिंह सेठी, संस्कृति रानी देसाई, आमना आज़मी, फ़रीद खान, हरि मृदुल, फिरोज खान,संजय भिसे, विभा रानी, ओबैद आजमी, मुस्तहसन अज़्म, सतीश सोलाकुरंकर, शैलजा पाठक, आसिफा कायनात, सुनील ओवाल, देवांग पारिख, विनोद कुमार झा, नवीन चतुर्वेदी, चित्रा देसाई, दिनेश शाकुल, आभा बोधिसत्व, धनंजय कुमार,अमित उपमन्यु, संध्या यादव, कल्पना उबाले, सुजाता राउत, मोहन काले, विमल चंद्र पांडेय, निर्मोही फड़के, भूपेंद्र मिश्र, जवाहरलाल निर्झर, निर्मला डोसी, कमलेश पाठक, फरहान हनीफ़, शर्मिला भट्ट, आनंद पेंढारकर, प्रज्ञा पद्मजा, छाया कोरेगावकर रामदास खेर, हुस्न तबस्सुम नेहा, सुजाता राउत, जे पी बघेल, अनिल गौड़, कृष्णा गौतम, कल्पना उबाले, विनायक पवार, प्रतिमा राज, रियाज रहीम, अताउर रहमान तारिक, प्रेमा झा, जितेंद्र पांडे, उषा मिश्रा और अन्य थे। इनके अतिरिक्त अन्य कई रचनाकारों ने भी अपनी कविताओं से इस मंच को अलंकृत किया। यह मुंबई के काव्य प्रेमियों के लिए एक विलक्षण और अविस्मरणीय अनुभव रहा। ‘कविता मुंबई २०२६’ को ऐतिहासिक बनाने में हृदयेश मयंक, हूबनाथ पांडेय, शैलेश सिंह, प्रशांत जैन, प्रमोद यादव, अल्का अग्रवाल सिगतिया, रीता दास राम, अवधेश राय, राकेश शर्मा, मुख़्तार खान, रमन मिश्र, सोनी, सर्वेश यादव, आशीष, याशर काजी, धीरज कुमार की उल्लेखनीय और प्रेरणादायक भूमिका रही। इन सभी मित्रों के निष्काम परिश्रम, समर्पण और हार्दिक सहयोग के बिना इस भव्य कार्यक्रम की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। यह आयोजन न केवल विविध भाषाओं का काव्य मिलन था, बल्कि भारतीय साझी संस्कृति और आत्मीयता का एक जीवंत दस्तावेज भी बन गया। यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि भाषाएं भले ही अनेक हों, किंतु कविता की भावना और संवेदना एक ही मानवीय हृदय से जुड़ती है।
