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6.55 लाख की बरामदगी मामले में नैनी पुलिस के तीन चौकी प्रभारी निलंबित

-रीवा के दो युवकों की गिरफ्तारी के बाद रकम बरामदगी में फर्जीवाड़े का खुलासा
-अदालत ने रिमांड अर्जी खारिज कर शिकायतों की जांच के दिए थे निर्देश

राजेश सरकार / प्रयागराज

अपराधियों पर शिकंजा कसने का दावा करने वाली पुलिस खुद ही सवालों के घेरे में आ जाए तो कानून-व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। नैनी थाने से जुड़े एक मामले में कथित बरामदगी और मुकदमे में दर्ज रकम के बीच भारी अंतर सामने आने के बाद प्रयागराज पुलिस कमिश्नरेट में खलबली मची है। मध्य प्रदेश के रीवा निवासी दो युवकों की गिरफ्तारी के दौरान 6.55 लाख रुपये मिलने की बात सामने आई, जबकि मुकदमे में महज 87,500 रुपये की बरामदगी दर्ज होने का आरोप है। रकम के इस अंतर ने पुलिस की कार्रवाई और बरामदगी के दस्तावेजों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआती जांच में भूमिका संदिग्ध मिलने पर तीन चौकी प्रभारियों को निलंबित कर विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं।
5.67 लाख रुपए का अंतर
मामला विपिन कुमार पाठक और आकाश सिंह की गिरफ्तारी से जुड़ा है। दोनों को एनडीपीएस और आर्म्स एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक गिरफ्तारी के दौरान 6.55 लाख रुपये मिलने की बात सामने आई, लेकिन मुकदमे में केवल 87,500 रुपये की बरामदगी दर्ज की गई। दोनों आंकड़ों के बीच 5 लाख 67 हजार 500 रुपये का अंतर है।
गिरफ्तार युवकों ने पुलिस पर फर्जी बरामदगी दिखाने और रुपये हड़पने के आरोप लगाए। इन आरोपों की पुष्टि अभी होनी है, लेकिन बरामदगी के आंकड़ों में सामने आए अंतर और उसके बाद हुई विभागीय कार्रवाई ने मामले को गंभीर बना दिया है। रकम कहां से मिली, उसे किसने कब्जे में लिया, जब्ती मेमो में कितनी राशि दर्ज हुई और शेष रकम के संबंध में पुलिस के पास क्या रिकॉर्ड है।
अदालत में भी उठे बरामदगी पर सवाल
15 अक्टूबर को अपर सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश एनडीपीएस एक्ट की अदालत ने पुलिस की रिमांड अर्जी खारिज करते हुए आरोपियों की शिकायतों की जांच के निर्देश दिए थे। अदालत में बरामदगी और तलाशी की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठे। कथित तौर पर बरामद असलहों का निरीक्षण करने के बाद अदालत ने उनके चलने की स्थिति पर भी टिप्पणी की थी। मामले से जुड़ी ऑडियो क्लिपों में भी रुपये, मुकदमे में दर्ज बरामदगी और समझौते को लेकर बातचीत होने का दावा किया गया है। इन ऑडियो की प्रामाणिकता और बातचीत के संदर्भ की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। ऐसे में जांच का दायरा केवल रकम के अंतर तक सीमित न रहकर बरामदगी की पूरी प्रक्रिया और सामने आए अन्य साक्ष्यों तक पहुंचना तय माना जा रहा है।
तीन चौकी प्रभारियों पर गिरी गाज
शुरुआती जांच में भूमिका संदिग्ध पाए जाने के बाद अरैल चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक विक्की गुप्ता, कांशीराम चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक रामानंद विश्वकर्मा और जिला कारागार चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक नीलेश कुमार को निलंबित किया गया है। डीसीपी यमुनानगर जोन विवेक चंद्र यादव ने कार्रवाई की पुष्टि की है। तीनों के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

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