सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) के पेपर लीक मामले में शिवसेना नेता, युवासेनाप्रमुख व विधायक आदित्य ठाकरे बेहद आक्रामक रुख अपना रहे हैं। इस मामले में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एसआईटी जांच का एलान किया है। हालांकि, आदित्य ठाकरे ने आज सीधे राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा से मुलाकात कर मांग की कि मामले की एसआईटी जांच नहीं, बल्कि न्यायिक जांच कराई जानी चाहिए।
एमपीएससी की परीक्षाओं में हो रही धांधली, पेपर लीक और छात्रों की आत्महत्या जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर आदित्य ठाकरे ने आज राजभवन (लोकभवन) में राज्यपाल वर्मा से मुलाकात की और उन्हें इस संबंध में पुख्ता सबूत सौंपे। बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने महायुति सरकार, मुख्यमंत्री फडणवीस और एसआईटी के अध्यक्ष पर तीखा निशाना साधा।
सालभर में १५-२० एसआईटी बनीं, एक की भी रिपोर्ट नहीं आई
राज्य सरकार ने एमपीएससी घोटाले की जांच के लिए एसआईटी गठित की है। इस पर आदित्य ठाकरे ने कहा कि पिछले एक साल में अलग-अलग मामलों की जांच के लिए १५-२० एसआईटी बनाई गर्इं, लेकिन इनमें से एक की भी रिपोर्ट अब तक सामने नहीं आई है। इसलिए इस मामले की सिर्फ और सिर्फ न्यायिक जांच होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री के आश्वासनों पर भरोसा नहीं
मुख्यमंत्री फडणवीस ने आश्वासन दिया है कि एसआईटी छात्रों की मांगों को आठ दिनों के भीतर पूरा करेगी। इस पर चुटकी लेते हुए आदित्य ठाकरे ने कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री के आश्वासनों पर भरोसा नहीं है।
एसआईटी अध्यक्ष इस्तीफा दें, वरना हटाना पड़ेगा
एमपीएससी परीक्षा के पेपर लीक मामले को लेकर आदित्य ठाकरे ने सीधे चेतावनी दी कि आयोग के अध्यक्ष विवेक भीमनवार तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें, वरना उन्हें पद से हटाना पड़ेगा। उन्होंने कहा, ‘हमारे पास पेपर लीक के पुख्ता सबूत हैं। आरोप लगाने वाले छात्र हवा में बातें नहीं कर रहे हैं। जब पहले दो परीक्षकों ने पेपर जांचकर अंक नहीं दिए, तो तीसरे परीक्षक ने अंक वैâसे दे दिए? एक ही कोचिंग क्लास और एक ही बैच के बच्चे वैâसे पास हो रहे हैं? यह सब दलालों का एक संगठित रैकेट है।’
