मुख्यपृष्ठनए समाचारचुनाव से पहले १.२२ करोड़ वोटरों की ‘दस्तावेजी परीक्षा’!

चुनाव से पहले १.२२ करोड़ वोटरों की ‘दस्तावेजी परीक्षा’!

-त्योहारी सीजन में दस्तावेज जमा करने के लिए रहें तैयार
-एसआईआर नोटिस के बाद ऑनलाइन भी जमा होंगे सबूत; विपक्ष के सामने बूथ-बूथ अपने मतदाता बचाने की चुनौती

सामना संवाददाता / मुंबई

महाराष्ट्र में एसआईआर के तहत १.२२ करोड़ संदिग्ध अथवा विसंगत रिकॉर्ड का मामला अब सिर्फ चौंकाने वाला आंकड़ा नहीं रह गया है। इस त्योहारी सीजन में इन मतदाताओं की दस्तावेजी जांच शुरू होने के साथ ही यह राजनीतिक दलों, खासकर विपक्ष के लिए बूथ स्तर की बड़ी परीक्षा में बदल रहा है। निर्वाचन अधिकारियों ने नोटिस पाने वाले मतदाताओं को राहत देते हुए दस्तावेज ऑनलाइन जमा करने की सुविधा भी उपलब्ध करा दी है।
मुंबई, ठाणे और एमएमआर की कई सीटों पर बदल सकता है चुनावी गणित
ड्राफ्ट सूची में शामिल ७.७१ करोड़ मतदाताओं में से करीब १.२२ करोड़ रिकॉर्ड में अतिरिक्त सत्यापन की जरूरत पड़ी है। इनमें ६२.४८ लाख मतदाताओं के रिश्तेदारों की जानकारी में विसंगति है, जबकि करीब ५९.७५ लाख रिकॉर्ड पुराने मतदाता अभिलेखों से पारिवारिक रूप से नहीं जुड़ सके हैं। इसका अर्थ नाम कट जाना नहीं है, लेकिन संबंधित मतदाताओं को अपनी पात्रता साबित करने के लिए निर्धारित प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
राजनीतिक चिंता उस आंकड़े से बढ़ रही है, जिसके अनुसार २० प्रतिशत से अधिक मुस्लिम आबादी वाली महाराष्ट्र की ३८ विधानसभा सीटों पर २९.७७ प्रतिशत मतदाता ड्राफ्ट सूची में आगे नहीं बढ़ पाए, जबकि राज्य का औसत २१.१४ प्रतिशत है। भिवंडी पूर्व में यह आंकड़ा ४९.१० प्रतिशत, मुंब्रा-कलवा में ४२ प्रतिशत से अधिक और मानखुर्द-शिवाजी नगर में भी ४२ प्रतिशत से अधिक रहा।
मुंबई-एमएमआर की कई ऐसी सीटें विपक्षी दलों के लिए चुनावी रूप से महत्वपूर्ण हैं। इसलिए विपक्ष के सामने अब वास्तविक चुनौती यह होगी कि उसका समर्थक केवल राजनीतिक रूप से उसके साथ न रहे, बल्कि उसका नाम अंतिम मतदाता सूची में भी सुरक्षित रहे। इसके लिए बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को मतदाता सूची की जांच करने, नोटिस पाने वालों तक पहुंचने, दस्तावेज तैयार कराने और सुनवाई की प्रक्रिया में सहायता करने पर जोर देना पड़ सकता है।
आवेदनों की भीड़ शुरू
स्थिति की गंभीरता का संकेत नागपुर से मिल रहा है, जहां छह विधानसभा क्षेत्रों में करीब ३४ हजार दावे, नाम जोड़ने और सुधार के आवेदन आ चुके हैं। यानी एसआईआर अब आंकड़ों के चरण से निकलकर आम मतदाता की भागदौड़ वाले चरण में प्रवेश कर चुका है। हालांकि तस्वीर एकतरफा नहीं है। बड़ी संख्या में मतदाता ड्राफ्ट सूची में आगे नहीं बढ़ पाए ऐसी सीटों में सत्ता पक्ष के प्रभाव वाले क्षेत्र भी शामिल हैं। इसलिए अभी यह कहना सही नहीं होगा कि प्रक्रिया केवल विपक्ष को ही नुकसान पहुंचाएगी।

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