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संपादकीय :  डोनाल्ड ट्रंप की खैरात!

भारत की तरह अमेरिका को भी भीख की लत लग गई है और येन-केन-प्रकारेण चुनाव जीतने के लिए प्रे. ट्रंप ने `रेवड़ी’ योजनाओं की घोषणा की है। डोनाल्ड ट्रंप ने डलास की एक चुनावी रैली में कहा कि अगर रिपब्लिकन पार्टी नवंबर के मध्यावधि चुनावों में संसद के दोनों सदनों में जीत हासिल करती है, तो हर अमेरिकी `एडल्ट सिटीजन’ के खाते में पांच हजार डॉलर जमा किए जाएंगे। यह पैसा उसे अमेरिका में ही खर्च करना होगा। इस अनूठी योजना को `ट्रंप डिविडेंड’ नाम दिया गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि प्रे. ट्रंप सरकारी खजाने का इस्तेमाल करके वोट खरीदने वाले हैं। दुनिया के सबसे मजबूत लोकतंत्र का ट्रंप ने यह जनाजा निकाला है। ईरान युद्ध में बेवजह कूदने के कारण अमेरिकी जनता ट्रंप से नाराज है। युद्ध की वजह से अमेरिका की अर्थव्यवस्था कमजोर हो गई है। महंगाई, रोजगार, कानून-व्यवस्था का सवाल वहां गंभीर बन गया है। ट्रंप ने अपने कार्यकाल में कोई बड़ा काम करके नहीं दिखाया है। धमकियां, युद्ध या वेनेजुएला जैसे छोटे देशों पर कब्जा करके वहां के तेल के कुओं पर अपना अधिकार जमाना, बस इतना ही उन्होंने किया है। दुनिया के कुछ मानसिक गुलाम देश ट्रंप की इन हरकतों पर तालियां बजा रहे हैं, लेकिन ईरान जैसे देश ने प्रे. ट्रंप के आगे झुकने के बजाय उन्हें सबक सिखाया और युद्ध में उलझाए रखा। इससे दुनिया में अमेरिका की जगहंसाई हुई। इस सबका नतीजा मध्यावधि चुनाव में दिखेगा और सत्ता हाथ से निकल जाएगी, ऐसा डर ट्रंप को सताने लगा है। इसीलिए वोट खरीदने की `मोदी युक्ति’ ट्रंप ने अपनाई लगती है। चार दिन पहले ही ट्रंप ने १० लाख भारतीयों को मतदाता सूची से हटाने का आदेश दिया। भारत में मोदी के खिलाफ जो माहौल गरमाया है, उसकी हवा अमेरिका पहुंचेगी और भारतीय उन्हेंं
वोट नहीं देंगे
इस डर से ट्रंप ने भारतीय और अन्य अंतर्राष्ट्रीय समुदायों के वोट हटाने का फैसला लिया। भारत में `एसआईआर’ के आवरण में ठीक यही लोकतंत्र विरोधी खेल चल रहा है। भारत के चुनाव तो सत्ताधारियों और चुनाव आयोग की आपराधिक सांठ-गांठ का खेल बनकर रह गए हैं। प्रे. ट्रंप महान अमेरिका को उसी रास्ते पर ले जाते दिख रहे हैं। पांच हजार डॉलर की `रिश्वत’ देकर वे एडल्ट्स के वोट खरीदने वाले हैं। ट्रंप ने चुनाव में दिया यह आश्वासन पूरा करने का तय किया, तो एक ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा का बोझ वहां के खजाने पर पड़ेगा। दुनिया के १७० देशों की अर्थव्यवस्थाओं से भी ज्यादा यह रकम ट्रंप वोट खरीदने के लिए रातों-रात बांटने वाले हैं। अमेरिका का राष्ट्रीय कर्ज ४० ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच गया है। वार्षिक घाटा १,८०० अरब डॉलर है। फिर इस `रेवड़ी’ को बांटने के लिए कांग्रेस की मंजूरी लगेगी। ट्रंप द्वारा प्रौढ़ नागरिकों को पांच हजार डॉलर बांटने की घोषणा करते ही उनकी अपनी पार्टी के मंत्री और नेता चकरा गए। उपराष्ट्रपति जे. डी. वेंस ने तो माथे पर हाथ मार लिया। वेंस ने कहा, `जांच-परख कर यह पैसा बांटा जाएगा। कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। अमीर प्रौढ़ों को इसका लाभ नहीं मिलेगा।’ यानी मोदी की तरह घोषणाएं करनी हैं, फिर शर्तों और तरकीबों का इस्तेमाल करके समय बिताना है। ट्रंप की एडल्ट्स अमेरिकी नागरिकों को पैसे देने की घोषणा चुनावी खुले बाजार की सबसे बड़ी रेवड़ी है। ‘If the Republicans win, you win with us and you get 5,000 dollars,’  ट्रंप की यह घोषणा वोटों का सीधा सौदा है। इसी अमेरिका ने कभी भारतीय अर्थव्यवस्था की
रेवड़ी संस्कृति का मजाक
उड़ाया था। भारत जैसा कर्जदार देश भी यही `रेवड़ियां’ बांटकर चुनाव जीत रहा है। २०१४ में नरेंद्र मोदी ने हर भारतीय के बैंक खाते में १५ लाख रुपए डालने का वादा किया था। उस पर वोट हासिल किए। वह १५ लाख का वादा आज तक पूरा नहीं हुआ है। मोदी हर चुनाव में कुछ न कुछ रेवड़ियां बांटते फिरते हैं और लोग उन रेवड़ियों के बहकावे में आ जाते हैं। महाराष्ट्र में लाडली बहन, मध्य प्रदेश में लाडली बहना, हरियाणा में लाडो लक्ष्मी; पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र, दिल्ली, गोवा में ऐसी रेवड़ियां बांटकर वोट खरीदे गए। हमारे देश में बेरोजगारी, महंगाई बढ़ रही है। कर्ज के तले किसान मर रहा है, आंदोलन चल रहे हैं; लेकिन इस पर प्रधानमंत्री मोदी चुप हैं। प्रेसीडेंट ट्रंप भी अपने देश की बदहाली पर `उफ’ तक नहीं कर रहे हैं। जनता के खजाने को लूटकर चुनाव जीतना है और उस लूट में चुनाव आयोग से `हाथ की सफाई’ करवा लेनी है। फिलहाल, दुनियाभर में यही मंजर दिख रहा है। प्रे. ट्रंप ने अमेरिका में और प्रधानमंत्री मोदी ने भारत में जो `रेवड़ी’ संस्कृति शुरू की है, उसने लोकतंत्र और इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। भारत में ८० करोड़ जनता आज भी मोदी द्वारा दी जा रही महीने की १० किलो मुफ्त अनाज योजना पर जी रही है, तो वे प्रगति का ढोल कैसे पीट सकते हैं? प्रे. ट्रंप भी अमेरिका को महान बनाना चाहते थे। वैसा उन्होंने बार-बार बोलकर जताया। हकीकत में ट्रंप ने अपना उद्योग-व्यापार बढ़ाया और आम अमेरिकी नागरिकों को भिखारी बना दिया। भारत में जो मोदी-शाह जैसे लोग कर रहे हैं, वही प्रे. ट्रंप अमेरिका में कर रहे हैं। सरकारी खजाना तोड़ो, लूटो, रेवड़ियां बांटो और चुनाव जीतो! इधर `लाडली बहनें’ तो उधर अमेरिका में `लाडले एडल्ट्स’। योजना और लाभार्थी भले अलग हों, लेकिन सरकारी खजाने से खैरात बांटने का पैटर्न एक ही है!

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