-मीरा-भायंदर में पानी नहीं, दोगुने दामों में ‘बीमारी’ बेच रहा टैंकर माफिया
-पानी की गुणवत्ता भगवान भरोसे, बिना जांच के दोगुने दामों में हो रही सप्लाई
सुरेश गोलानी / मुंबई
मीरा-भायंदर शहर में जल कटौती लागू होते ही निजी टैंकर चालकों ने आपदा को अवसर में बदल दिया है। शहर में पानी की भारी किल्लत का फायदा उठाकर निजी टैंकर माफिया ने पानी के दामों में सीधे दोगुनी बढ़ोतरी कर दी है। इसके चलते आम जनता को अब ५०० लीटर पानी के लिए ४००-४५० रुपए की जगह ७००-७५० रुपए चुकाने पड़ रहे हैं, जिससे नागरिकों पर भारी आर्थिक बोझ आ पड़ा है। निजी टैंकर चालकों की इस मनमानी के बीच अब पानी की शुद्धता को लेकर भी बड़े सवाल खड़े होने लगे हैं। शहर में सक्रिय निजी टैंकर माफिया न सिर्फ मनमाने दाम वसूल रहे हैं, बल्कि बिना किसी सरकारी जांच या सर्टिफिकेशन के धड़ल्ले से पानी बेच रहे हैं। पानी की किल्लत से जूझ रहे लोग मजबूरी में बिना गुणवत्ता जांचे ही इस पानी को खरीदने को मजबूर हैं, जिससे नागरिकों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है। सूत्रों के मुताबिक, शहर में कई टैंकर चालक बोरवेल और तालाबों से सीधे पानी भर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि मनपा का जलापूर्ति विभाग केवल शिकायतों पर कार्रवाई की बात कर रहा है, लेकिन सड़कों पर दौड़ रहे सैकड़ों टैंकरों के पानी की शुद्धता जांचने के लिए प्रशासन के पास कोई ठोस व्यवस्था या तंत्र नहीं है। प्रशासन की लापरवाही के कारण इस त्योहारी सीजन में जलजनित बीमारियों और महामारी पैâलने का खतरा दोगुना हो गया है। बिना जांच के मिल रहा यह पानी नागरिकों को सीधे अस्पतालों के चक्कर काटने पर मजबूर कर सकता है। दूषित पानी से पेट के गंभीर इन्फेक्शन, टायफाइड और पीलिया जैसी बीमारियां फैलने की आशंका जताई जा रही है।
ज्ञात हो कि शहर को शहाड-टेमघर (स्टेम) जल प्राधिकरण और महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (एमआइडीसी) की ओर से रोजाना लगभग १९५-२०० मिलियन लीटर (एमएलडी) पानी की आपूर्ति की जाती है, जो पहले से ही शहर की मौजूदा आबादी की आवश्यकताओं के लिए काफी नहीं है। ऐसे में भविष्य में संभावित जल संकट को देखते हुए मनपा ने सरकारी आदेशों के अनुसार शहर में १० फीसदी पानी कटौती लागू की है। इस पैâसले के पहले ही हफ्ते में शहर की जलापूर्ति पूरी तरह चरमरा गई है और कई इलाकों में जल संकट गहराता जा रहा है।
