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रांची में आयोजित राष्ट्रीय पुस्तक मेला में झारखंड की संस्कृति और जनजातियां पर विचार गोष्ठी

अनिल मिश्र / रांची

झारखंड प्रदेश की राजधानी रांची में स्थित जिला स्कूल मैदान में समय इंडिया, नई दिल्ली तत्वावधान में जारी दस दिवसीय राष्ट्रीय पुस्तक मेला में नए वर्ष के प्रथम दिन का स्वागत कवि सम्मेलन से हुआ। झारखंड हिन्दी साहित्य मंच की ओर से आमंत्रित स्थानीय कवियों ने अपनी कविताएं, गीत, ग़ज़ल, नज्में सुनाकर पुस्तक प्रेमियों का भरपूर मनोरंजन किया और उनका दिल जीता। कवि सम्मेलन का आगाज वैद्यनाथ मिश्र की सरस्वती वंदना से हुआ। जिन कवियों ने कवि सम्मेलन में काव्य पाठ कर श्रोताओं को प्रभावित किया उनमें निरंजन प्रसाद श्रीवास्तव, डाॅ. अंजेश कुमार, वैद्यनाथ मिश्र, कामेश्वर कुमार सिंह, राजीव थेपड़ा, विनोद सिंह गहरवार, विनय कुमार पाण्डेय, देशदीप ठाकुर, जनाब नासीर अफसर, निराला पाठक, राकेश रमण रार, डाॅ. सिद्धेश्वर काश्यप, सरोज झारखंडी और हिमकर श्याम प्रमुख रहे। काव्य रसिक श्रोताओं ने कवि सम्मेलन का भरपूर आनन्द उठाया और ऐसे रचनात्मक कार्यक्रम की सराहना भी की। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता हिन्दी साहित्य मंच के कार्यकारी अध्यक्ष निरंजन प्रसाद श्रीवास्तव ने की। उन्होंने पुस्तक मेला के मंच पर कवियों की उपस्थिति के लिए मेला आयोजन समिति को बधाई दी और वर्ष के पहले दिन पुस्तकों के बीच काव्य पाठ को एक सुखद अनुभव बताया। श्री श्रीवास्तव ने कहा कि आज सच्चे अर्थों में कवि, उसकी कृति और उसका पाठ मंच पर जीवंत हो उठा है। कवि सम्मेलन का सफल संचालन डाॅ. अंजेश कुमार और धन्यवाद ज्ञापन कृष्ण विश्वकर्मा ने किया। मंच पर समय इंडिया के प्रबंन्ध न्यासी चन्द्र भूषण, मंच के संरक्षक विनय सरावगी और रांची विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के पूर्व अध्यक्ष डाॅ. जंग बहादुर पाण्डेय की गरिमामय उपस्थिति रही। पुस्तक मेला आपके लिए 4 जनवरी तक ही जारी है। इस बीच पुस्तक मेले में जारी संवाद की कड़ी में आज गुरुवार को झारखंड संस्कृति और जनजीवन विषय पर चर्चा सम्पन्न हुई। इस चर्चा में स्थानीय वक्ताओं ने झारखंड संस्कृति का आम जनजीवन पर पड़े गहरे प्रभाव का विश्लेषण और संस्कृति और जीवन के रिश्ते की चर्चा की। यह चर्चा झारखंड संस्कृति को समझने की दृष्टि प्रदान करने में सफल रही।इस पुस्तक मेले में विभिन्न स्टाॅल्स पर जहाँ बच्चों, युवाओं और वरिष्ठों के लिए उनकी रुचि की असंख्य पुस्तकें उपलब्ध हैं वहीं नाट्य साहित्य और नाट्य लेखन में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए पुस्तकों का अनूठा संसार यहाँ से वहाँ तक पसरा है। झारखंड झरोखा मेले में एक ऐसा स्टाॅल है जहाँ पर आप राज्य से संबंधित तमाम उपयोगी पुस्तकों के साथ राजकमल प्रकाशन और वाणी प्रकाशन की चर्चित पुस्तकें खरीद सकते हैं। समय प्रकाशन के स्टाॅल पर चतुर्भुज रचनावली, भारतीय और विदेशी नाटकों का इतिहास, सुनील कुमार प्रिय का मकड़जाल, मधु शुक्ला का ढोल की पोल, जितेन्द्र सहाय का भटकते लोग पुस्तकें चुन और खरीद सकते हैं। प्रकाशन संस्थान के स्टाॅल पर जयशंकर प्रसाद के नाटकों के अतिरिक्त अनन्त कुमार सिंह का और लातूर गुम हो गया, यश अहमद का गुम दरवाजे, कम्पनी बहादुर जैसे चर्चित नाट्य पुस्तकें उपलब्ध हैं।इस पुस्तक मेला में कल शुक्रवार को अपराह्न तीन बजे नाट्य प्रेमियों के लिए एकल नाट्य प्रतियोगिता का कार्यक्रम आयोजित है। रंगमंच और रंगकर्म में रुचि रखने वाले रंगकर्मियों और नाट्य संस्थाओं के लिए यह सुनहरा अवसर होगा। यहाँ आप किताबों की अनोखी दुनिया के बीच नाटकों का प्रदर्शन कर सकेंगे। नाट्य संस्थाएं इस प्रतियोगिता के लिए सादर आमंत्रित हैं। सायं पांच बजे संस्कृति और समाज पर परिचर्चा आयोजित है। जबकि पुस्तक मेले में पुस्तक लोकार्पण के तहत शुक्रवार अपराह्न दो बजे देवबिहारी शर्मा आई.पी.एस. के दो काव्य संग्रहों में संघानित और तुम अपनी नफरत मुझे दे दो का लोकार्पण होगा।

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