– एक वाहन पर `३ लाख से अधिक खर्च
– किसान पानी और राहत के लिए तरस रहे, सरकार ने इनोवा हाईक्रॉस को दिखाई हरी झंडी
लोकायुक्त के चार सदस्यों के लिए `१.३२ करोड़ की चार नई गाड़ियां
राजन पारकर / मुंबई
महाराष्ट्र के बड़े हिस्से में गंभीर सूखे, किसानों के सामने पानी और फसल बचाने के संकट तथा ग्रामीण क्षेत्रों में राहत की प्रतीक्षा के बीच राज्य सरकार ने चार महंगी गाड़ियों की खरीद को मंजूरी दी है। महाराष्ट्र लोकायुक्त कार्यालय के चार सदस्यों के लिए चार नई इनोवा हाईक्रॉस जेडएक्स-७एस गाड़ियां खरीदने पर सरकारी खजाने से कुल १ करोड़ ३२ लाख १८ हजार ७६८ रुपए खर्च किए जाएंगे।
सामान्य प्रशासन विभाग ने २८ सितंबर २०२६ को जारी सरकारी आदेश में इस खर्च को मंजूरी दी है। प्रत्येक वाहन की लागत ३३ लाख ४ हजार ६९२ रुपए निर्धारित की गई है। इसमें वस्तु एवं सेवा कर, मोटर वाहन कर, पंजीकरण शुल्क, अतिरिक्त सुविधाएं, कांच पर सिरेमिक परत और विस्तारित वारंटी का खर्च भी शामिल है।
खेत में पानी नहीं, गाड़ी में सुविधाओं की कमी नहीं!
राज्य के कई इलाकों में कुएं सूख रहे हैं, टैंकरों पर निर्भरता बढ़ रही है और किसान अगली फसल तथा पशुओं के चारे को लेकर चिंतित हैं। ऐसे समय में चार महंगी गाड़ियों पर १.३२ करोड़ रुपए खर्च करने से सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठ रहे हैं।
जनता पर बोझ, सरकारी बाबुओं के लिए नई गाड़ियों का शौक!
सरकारी खजाने पर ऐशोआराम का बोझ बढ़ाने वाली यह खरीद अब सवालों के घेरे में है। सूखे की मार झेल रहे किसान के लिए सरकार के पास संसाधनों की कमी है, लेकिन लोकायुक्त के लिए चार महंगी गाड़ियों पर १.३२ करोड़ रुपए खर्च करने की तैयारी है। आखिर प्राथमिकता किसान है या सरकारी गाड़ियों की चमक? लोकायुक्त सदस्यों को सरकारी कामकाज के लिए वाहनों की आवश्यकता हो सकती है। आदेश में वाहन समीक्षा समिति और वित्त विभाग की सहमति का भी उल्लेख है। सवाल वाहन की आवश्यकता का नहीं, बल्कि चार नई महंगी गाड़ियां एक साथ खरीदने की अनिवार्यता का है। सरकार को बताना चाहिए कि लोकायुक्त कार्यालय में अभी कितने वाहन उपलब्ध हैं? उनकी स्थिति क्या है? क्या पुराने वाहनों की मरम्मत अथवा साझा उपयोग संभव नहीं था? क्या कम कीमत वाले सुरक्षित वाहनों के विकल्प पर विचार किया गया? यह राशि वर्ष २०२६-२७ के ‘कार्यालय खर्च’ मद से दी जाएगी। खरीद के बाद उपयोग प्रमाणपत्र और विस्तृत बिल शासन को सौंपने होंगे। किसान खेत की मिट्टी और फसल बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है, जबकि सरकारी वाहन को चमकाने का खर्च भी जनता उठाएगी। सरकार स्पष्ट करे कि सूखे के बीच यह खरीद तत्काल क्यों जरूरी थी।
