अनिल मिश्र / गयाजी
बिहार प्रदेश के धार्मिक, अध्यात्मिक, पौराणिक एवं ऐतिहासिक नगरी दो दिनों के लिए राजधानी पटना के बाद प्रशासनिक नगरी बन गया है। दरअसल, आज से गया जी शहर के बिपार्ड में आयोजित दो दिवसीय प्रबोधन कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर देश के महामहिम उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी सहित अन्य गणमान्य लोगों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत किए। इस अवसर पर गयाजी में आयोजित दो दिवसीय प्रबोधन कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने जनप्रतिनिधियों को जनसेवा, सुशासन और बिहार के समग्र विकास का संदेश दिया। वहीं महामहिम उपराष्ट्रपति ने कहा कि चुनाव जीतना लोकतंत्र की पहली सीढ़ी है, लेकिन जनता का स्थायी विश्वास केवल सेवा और संवेदनशील नेतृत्व से ही हासिल किया जा सकता है। उन्होंने बिहार से पलायन रोकने और राज्य को रोजगार का केंद्र बनाने का आह्वान भी किया। वहीं इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने कहा कि बिहार का विकास ऐसा होना चाहिए कि यहां के युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में न जाना पड़े। बल्कि ऐसी परिस्थितियां बनें कि देश के अन्य हिस्सों के लोग रोजगार और अवसर की तलाश में बिहार आएं। उन्होंने कहा कि जनता ने जनप्रतिनिधियों पर विश्वास जताया है और अब उनकी जिम्मेदारी विकास के माध्यम से उस भरोसे को मजबूत करने की है।गया के बिपार्ड में आयोजित विधायक प्रबोधन कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि चुनाव जीतना लोकतंत्र की शुरुआत है, लेकिन जनता का विश्वास सेवा और सुशासन से कायम रहता है। उन्होंने बिहार को रोजगार का केंद्र बनाने, पलायन रोकने, सदन में मर्यादित संवाद बनाए रखने और 2047 के विकसित भारत में बिहार की महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का आह्वान किया। वहीं इस अवसर पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आज शनिवार को कहा कि लोकतंत्र की मजबूती जनप्रतिनिधियों की सक्रियता और जवाबदेही पर निर्भर करती है। उन्होंने विधायकों से आह्वान किया कि वे विधानसभा की कार्यवाही और संसदीय प्रक्रियाओं का अधिकतम उपयोग करते हुए जन समस्याओं को प्रभावी ढंग से सरकार तक पहुंचाएं। जबकि बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बदलते तकनीकी दौर का उल्लेख करते हुए बिहार विधानसभा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित करने की आवश्यकता जताई। गया जी स्थित बिहार इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन एंड रूरल डेवलपमेंट (बिपार्ड) में में उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी अपने क्षेत्र की समस्याओं, अपेक्षाओं और सुझावों को सदन के माध्यम से सरकार तक पहुंचाना है।इस बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि प्रश्नकाल, शून्यकाल, ध्यानाकर्षण, कटौती प्रस्ताव और अन्य संसदीय उपकरण केवल औपचारिक प्रक्रियाएं नहीं हैं, बल्कि लोकतंत्र में जनता की आवाज को मजबूती देने के प्रभावी माध्यम हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पूरी दुनिया तेजी से बदल रही है और तकनीक का महत्व लगातार बढ़ता जा रहा है। आपको जानकारी दे दें कि बिहार प्रदेश के गया जी शहर में स्थित बिपार्ड परिसर में 11 और 12 जुलाई को बिहार विधानसभा के सभी विधायकों के लिए दो दिवसीय आवासीय प्रबोधन कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसका उद्घाटन महामहिम उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने किए। वहीं इस दो दिवसीय प्रवोधन कार्यक्रम में सभी विधायकों को प्रशिक्षण के दौरान संसदीय कार्यप्रणाली, विधायी प्रक्रिया, ई-विधानसभा और सुशासन जैसे विषयों पर देशभर से आए विभिन्न विशेषज्ञ मार्गदर्शन देंगे।
