सामना संवाददाता / मुंबई
डोंबिवली के शास्त्रीनगर अस्पताल में डॉक्टरों से मारपीट के आरोपी शिंदे गुट के नगरसेवक रमेश म्हात्रे को लेकर एक चौंकानेवाला तथ्य सामने आया है। जिन डॉक्टरों और चिकित्सा व्यवस्था ने कभी उनके सीने में धंसी गोली निकालकर उनकी जान बचाई थी, आज उसी चिकित्सा समुदाय के डॉक्टरों और कर्मचारियों पर उन्होंने हमला कर उनके साथ मारपीट की। हालांकि, अब वे कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे हैं। इस घटनाक्रम की पूरे ठाणे जिले में व्यापक चर्चा हो रही है।
जानकारी के अनुसार, वर्ष २००८ में गुंडा प्रवृत्ति के रमेश म्हात्रे पर जानलेवा गोलीबारी हुई थी। उस हमले में उनकी शर्ट की जेब में रखा पेन गोली की रफ्तार कम कर गया, लेकिन गोली उनके सीने में जा धंसी। गंभीर हालत में उन्हें डोंबिवली के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉ. मिलिंद शिरोडकर ने तत्काल ऑपरेशन कर उनकी जान बचाई थी। बताया जाता है कि इससे पहले भी एक अन्य हमले में रमेश म्हात्रे की एक किडनी गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गई थी। उस समय भी डॉ. मिलिंद शिरोडकर ने सर्जरी कर उनकी एक किडनी निकालकर उनकी जान बचाई थी।
डॉक्टरों से मारपीट के मामले में गिरफ्तार रमेश म्हात्रे फिलहाल स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण कलवा सरकारी अस्पताल में भर्ती हैं। उन्हें उच्च रक्तचाप और अन्य स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों का उपचार दिया जा रहा है। हालांकि, अदालत ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से पेश करने का आदेश दिया है।
मारपीट के बाद अस्पताल में माहौल तनावपूर्ण
डॉक्टरों से मारपीट, अभद्रता और गाली-गलौज की घटना के बाद केडीएमसी के शास्त्रीनगर अस्पताल का माहौल तनावपूर्ण है। घटना से आहत होकर डॉ. सृष्टि बाविस्कर और डॉ. वैभव सालुंके ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। अस्पताल के कई अन्य कर्मचारी भी मानसिक रूप से आहत बताए जा रहे हैं।
