सुनील ओसवाल / मुंबई
केंद्रीय मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल को लेकर दिल्ली से लेकर महाराष्ट्र तक राजनीतिक सरगर्मियां तेज हैं। इसी बीच भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावडे की राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार) के वरिष्ठ नेता एकनाथ खडसे से मुंबई स्थित उनके आवास पर हुई मुलाकात ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। भाजपा इसे शिष्टाचार भेंट बता रही है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस मुलाकात को केवल औपचारिक मुलाकात मानने को कोई तैयार नहीं है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर महाराष्ट्र में बदलते राजनीतिक समीकरण, स्थानीय निकाय चुनावों की तैयारी और भाजपा के संगठनात्मक पुनर्गठन के बीच यह मुलाकात कई सवाल छोड़ गई है। चर्चा यह भी है कि अनुभवी ओबीसी नेता एकनाथ खडसे की भाजपा में वापसी का रास्ता फिर से तलाशा जा रहा है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि किसी स्तर पर नहीं हुई है।
एकनाथ खडसे कभी भाजपा के सबसे प्रभावशाली ओबीसी चेहरों में गिने जाते थे। उत्तर महाराष्ट्र में पार्टी का मजबूत जनाधार तैयार करने में उनकी अहम भूमिका रही। विधायक, विपक्ष के नेता और मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद संभालने वाले खडसे ने भोसरी भूमि प्रकरण के बाद मंत्रीपद छोड़ा और बाद में पार्टी के भीतर खुद को उपेक्षित महसूस करने की बात सार्वजनिक रूप से कही। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मतभेद और वरिष्ठ नेताओं के साथ राजनीतिक टकराव के बाद उन्होंने भाजपा छोड़कर राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार) का दामन थाम लिया था।
सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ समय से खडसे की भाजपा में वापसी को लेकर समय-समय पर चर्चाएं होती रही हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान भी ऐसी अटकलें सामने आई थीं कि उन्होंने भाजपा नेतृत्व के समक्ष वापसी की इच्छा जताई थी। हालांकि, उस समय मामला आगे नहीं बढ़ सका।
अब विनोद तावडे की मुलाकात ने इन चर्चाओं को नई ऊर्जा दे दी है। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व उत्तर महाराष्ट्र में संगठन को और मजबूत करने के लिए पुराने और प्रभावशाली नेताओं को फिर से साथ लाने के विकल्प पर विचार कर सकता है। कुछ राजनीतिक पर्यवेक्षक इसे पार्टी के भीतर भविष्य के शक्ति-संतुलन से भी जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि, भाजपा की ओर से इस तरह की किसी रणनीति की पुष्टि नहीं की गई है। फिर भी यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें तेज हैं और महाराष्ट्र भाजपा के भीतर भविष्य की राजनीतिक रणनीति को लेकर चर्चाएं जारी हैं।
