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गड्ढा सड़क में या मनपा का सिस्टम गड्ढे में?..मीरा-भायंदर की सड़कें बनीं ‘मंगल ग्रह’!.. भ्रष्टाचार-कमीशनखोरी के कारण करोड़ों रुपए पानी में

सुरेश गोलानी / मुंबई

मीरा-भायंदर की अधिकांश सड़कों की हालत देखकर लगता है जैसे आप ‘मंगल ग्रह’ पर चल रहे हों। शहर के मुख्य और आंतरिक मार्ग हजारों गड्ढों और क्रेटरों से भरे हैं। लगता है जैसे मनपा ने नागरिकों के लिए गड्ढायुक्त सड़कों पर ‘मुफ्त मंगल दर्शन’ की व्यवस्था कर दी है। एक तरफ ये उधड़ी सड़कें हर रोज हादसों को न्योता दे रही हैं, तो वहीं दूसरी तरफ लोकनिर्माण विभाग के अधिकारी और ठेकेदार कमीशनखोरी में व्यस्त हैं।
हर साल मनपा बजट में गड्ढे भरने के लिए करोड़ों का प्रावधान करती है। कभी ‘अल्ट्रा-थिन व्हाइट टॉपिंग’, कभी ‘मैस्टिक’ और ‘जेट पैचर’ तकनीक के दावे होते हैं। पैसा खर्च भी होता है, लेकिन नतीजा शून्य। बारिश में गड्ढों में पानी भर जाने से गहराई का पता नहीं चलता। नतीजतन वाहन चालक, स्कूली बच्चे और वरिष्ठ नागरिक आए दिन दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं। पैसा खर्च भी होता है, बावजूद इसके सड़कों की सूरत दुरुस्त नहीं हो पाती है।
मुसीबत बने अधूरे सीसी रोड
शहर में २ साल से अधूरे पड़े सीसी रोड लोगों की मुसीबत बढ़ा रहे हैं। मनपा ने ५१५ करोड़ की योजना से आंतरिक सड़कों को सीमेंट-कांक्रीट में बदलने का वादा किया था। लेकिन ठेकेदारों पर घटिया सामग्री, गुणवत्ता से समझौता और मानकों की अनदेखी के आरोप लग रहे हैं। यहां तक कि मनपा आयुक्त के मीरा रोड स्थित कनकिया बंगले तक जाने वाली नई सीसी सड़क में भी अभी से दरारें आ गई हैं।
कांग्रेस की ‘गड्ढा रील’ स्पर्धा
खराब सड़कों के खिलाफ मनपा में कांग्रेस नगरसेवक जय ठाकुर ने अनोखा ‘गड्ढा रील स्पर्धा’ का आयोजन किया है। स्पर्धा में हिस्सा लेने हेतु नागरिकों से अपने आस-पास के खतरनाक गड्ढों और खस्ताहाल सड़कों का एक क्रिएटिव वीडियो (रील) बनाकर ९ जुलाई से २३ जुलाई के बीच इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर #ReelForRoads हैशटैग के साथ पोस्ट करके jaythakurspeaks@gmail.com पर ईमेल करना होगा। विजेताओं को मेडिकल इंश्योरेंस, कार इंश्योरेंस और बाइक इंश्योरेंस से सम्मानित करने के अलावा चयनित प्रतिभागियों को हेलमेट और फर्स्ट-एड किट भी दिए जाएंगे।
ऑडिट सिर्फ कागजों पर
हाल ही में बनी और मरम्मत की गई अधिकांश सड़कों का खस्ता हाल मनपा ठेकेदारों पर लागू दो साल का दोष दायित्व अवधि (डीएलपी) के कार्यान्वयन पर सवालिया निशान खड़े करता है। इसके अलावा गड्ढों को ठीक करने के काम पर नजर रखने के उद्देश्य से अनिवार्य तीसरे पक्ष का निरीक्षण (थर्ड पार्टी ऑडिट) भी कथित रूप से सिर्फ कागजों तक ही सीमित है, जो मनपा अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच की सांठगांठ को उजागर करता है।

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