उमेश गुप्ता/वाराणसी
काशी हिंदू विश्वविद्यालय में गुरुवार को “महिला आरक्षण बिल- सशक्तिकरण की पहल या राजनीतिक रणनीति विषय पर एक अकादमिक विमर्श का आयोजन हुआ. इसमें मुख्यतिथि के रूप में बोलते हुए लॉ फैकल्टी के प्रोफेसर रहे अखिलेन्द्र पांडेय ने कहा कि नारी शक्ति अभिनंदन अधिनियम को जिस तरह से पेश किया गया उसे देख कर लगता है कि ये
एपस्टीन फ़ाइल की बात से ध्यान हटाने के लिए सरकार का उठाया गया कदम है . इसे लाने के पीछे इनकी मंशा सिर्फ अपनी इमेज को सुधारने की थी . उन्होंने कोड और एक्ट को लेकर विस्तार से बात की और हिंदू कोड का उदाहरण लेकर राजेंद्र प्रसाद और आंबेडकर के डिबेट को समझाया . उन्होंने मोतीलाल नेहरू की रिपोर्ट का जिक्र किया जिसमें फंडामेंटल राइट की बात की शुरुआत हुई. साथ ही आज की तारीख में सुप्रीम कोर्ट में सिर्फ एक महिला जज हौंट, जबकि हाईकोर्ट में लगभग 35% भागीदारी है . इसे देखकर सरकर की मंशा आफ़ पता चलती है. उन्होंने महिला आरक्षण बिल को लेकर कहा की बीजेपी ने इसे 1996 से 2023 तक लटकाये रखा .
प्रोफेसर मल्लिकार्जुन जोशी ने कहा की नारी शक्ति अधिनियम डिलिमिटेशन को महिला आरक्षण के झाँसे में साड़ी में लपेटकर पेश किया गया. ये महिला आरक्षण आजतक का सबसे बड़ा छल है . असलियत सिर्फ आज की सत्ता बचाने की चाल है . इतिहास में इसे सिर्फ़ एक हिस्टोरिकल फ़्रॉड के रूप में जाना जाएगा.
प्रोफ़ेसर एन के दुबे ने कहा कि ये अधिनियम पूर्ण रूप से राजनीतिक रणनीति थी. बनारस के BLW में सरकारी खर्चे पर बीजेपी का कार्यक्रम हुआ. इस अधिनियम को देखकर साफ़ लगता है कि ये पॉलीटिकल था.
हिंदी विभाग की डॉक्टर प्रियंका सोनकर ने कहा कि महिलाओं को बच्चा पैदा करने की मशीन बनाने की कोशिश हो रहा. ये बिल बार बार एक मुद्दे पर आकर रुक जाता है . कोटा में कोटा पर बात होती है. लेकिन इसे इम्प्लीमेंट नहीं किया जाता . ओबीसी महिला के लिए इनके पास कोई योजना नहीं है.
प्रोफेसर राजीव मंडल ने प्रधानपति के कॉन्सेप्ट पर सवाल उठाया और पंचायत की मीटिंग में प्रधानपति के शामिल होने पर कटाक्ष किया. उन्होंने कहा कि महिलाओं को एम्पावरमेंट चाहिए, भीख नहीं चाहिए. महिलायें तबसे ग़ुलाम थीं, जबसे ग़ुलाम की अवधारणा नहीं थी. लाभार्थी बनने से आप सशक्त नहीं होंगे.
लाभार्थी का अर्थ है जिसमे आपको नागरिक से सब्जेक्ट में बदल देते हैं
जागृति राही ने SIR को इससे जोड़कर कहा की जिनके नाम कटे वो भी तो महिला हैं. नारी शक्ति अभिनंदन अभी दूर की बात है . पहले जो नाम कटा, उन महिलाओं का क्या होगा. उन्होंने पंचायती राज मंत्रालय की व्यवस्था पर सवाल उठाई और कहा कि संघर्ष करने वाली महिला पसंद नहीं आती. हर पार्टी के लोगों को रिमोट से चलने वाली महिला नेता पसंद है. उन्होंने सवाल उठाया की राज्यसभा में आरक्षण क्यों नहीं दिया जा रहा.
कार्यक्रम का आयोजन काशी हिंदू विश्वविद्यालय में हुआ. कार्यक्रम के कन्वेनर प्रोफेसर अवधेश सिंह और को- कन्वेनर कुसुम वर्मा रही. संचालन डॉक्टर शार्दूल चौबे ने किया.
