-सरोगेट विज्ञापन के इस मायाजाल पर कब लगेगी लगाम?
-सोडा तो बस बहाना है, बियर ब्रांड को चमकाना है
सुरेश गोलानी / मुंबई
इन दिनों टीवी और अन्य प्रसार माध्यमों पर दिखाए जाने वाले विमल इलायची के विज्ञापन वाला मामला सुर्खियों में हैं, क्योंकि, सरोगेट विज्ञापन का आरोप लगाते हुए महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने आयुक्त तुकाराम मुंढे की अगुवाई में मशहूर बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। एफडीए का दावा किया है कि इलायची के उनके ब्रांडिंग की आ़ड़ में उपभोक्ताओं को अप्रत्यक्ष रूप से प्रतिबंधित पान मसाला ब्रांड के प्रचार को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी प्रकार ठाणे जिला के आबकारी विभाग की नाक के नीचे सोडा, पानी और अन्य प्रोडक्टस के प्रचार की आड़ में मीरा-भायंदर के कई बियर सरोगेट विज्ञापन का सहारा लेकर खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। उदाहरण के तौर पर मीरा रोड के बेवर्ली पार्क इलाके में स्थित एक बियर शॉप जिसके मुख्य साइन बोर्ड पर बड़े-बड़े अक्षरों में एक बियर ब्रांड का नाम और लोगो लिखा गया है। पहली नजर में यह बोर्ड किसी नामी बीयर ब्रांड का विज्ञापन लगता है, लेकिन कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए छोटे अक्षरों में ‘सोडा’ लिख दिया गया है। ऐसा ही नजारा शहर के कई अन्य बियर/ वाइन शॉप और बारों में देखा जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार की विज्ञापनबाजी पूरी तरह भ्रामक और केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) के नियमों का उल्लंघन है। नियमानुसार कोई भी शराब कंपनी अपने मूल शराब उत्पाद से मिलते-जुलते नाम का इस्तेमाल करके सोडा, पानी या किसी अन्य वैध चीज का प्रचार नहीं कर सकती। सीसीपीए और आबकारी विभाग को ऐसे अवैध विज्ञापनों के खिलाफ सख्त कार्यवाही करने का पूरा अधिकार है। ऐसे भ्रामक सरोगेट विज्ञापनों को बढ़ावा देने वाली कंपनियों और विक्रेताओं पर १० से लेकर ५० लाख रुपए तक का भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा बार-बार नियमों को तोड़ने वाली दुकानों के लाइसेंस सस्पेंड या रद्द करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।
क्या है सरोगेट विज्ञापन?
भारत में कानूनन शराब के सीधे विज्ञापन पर पूरी तरह प्रतिबंध है। इसके तोड़ के रूप में शराब बनाने वाली पैâक्ट्रियों (डिस्टिलरी) और ब्रुअरीज (जहां बीयर बनती है) उसी नाम का सोडा, म्यूजिक सीडी या पानी बाजार में उतारती हैं और उसका विज्ञापन करती हैं। इसे ही ‘सरोगेट विज्ञापन’ कहा जाता है। ऐसे विज्ञापन वाले बोर्ड लगाने वाले दुकान के मालिकों को फीस के रूप में हर महीने राजस्व प्राप्त होता है।
