-चीन की भूमिका पर उठे सवाल, कांग्रेस बोली-देश को सच बताइए
-पूर्व सीडीएस के बयानों में अंतर का मुद्दा गरमाया, जयराम रमेश ने व्यापक समीक्षा की मांग की पूछा-क्या बदली जा रही है ऑपरेशन सिंदूर की कहानी?
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
ऑपरेशन सिंदूर को लेकर २७ अगस्त को सियासी घमासान तेज हो गया। कांग्रेस महासचिव और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के हालिया बयानों में चीन की भूमिका को लेकर कथित अंतर पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि इससे देश में भ्रम पैदा हो रहा है और सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि पाकिस्तान के साथ हुए सैन्य संघर्ष के दौरान चीन की वास्तविक भूमिका क्या थी।
मामला इसलिए गंभीर है, क्योंकि ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव तक सीमित नहीं था। पाकिस्तान को चीन से मिले हथियारों और सैन्य प्रणालियों की भूमिका भी इस पूरे संघर्ष में चर्चा का विषय रही है। ऐसे में चीन की भूमिका को लेकर अलग-अलग दावे सामने आना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील सवाल खड़े करता है।
पूर्व सीडीएस के खुलासों ने बढ़ाई गर्मी
पूर्व सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने हाल के दिनों में ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े कई अहम ऑपरेशनल विवरण सार्वजनिक किए हैं। उन्होंने बताया कि २९ अप्रैल की बैठक में पाकिस्तान को बड़ा सबक सिखाने का पैâसला हुआ था और सैन्य नेतृत्व को कार्रवाई के साथ उसके सबूत सुनिश्चित करने को कहा गया था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पाकिस्तान के किराना हिल्स स्थित कथित परमाणु प्रतिष्ठान को भारत ने जानबूझकर निशाना नहीं बनाया था। उनके मुताबिक, सरगोधा क्षेत्र में रडार खोजने के लिए भेजा गया एक लॉटरिंग म्यूनिशन संभवत: ईंधन खत्म होने के बाद किराना हिल्स में गिर गया। यही खुलासे अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गए हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा पर राजनीति कितनी उचित?
यहां सरकार के सामने भी एक मुश्किल सवाल है। सैन्य अभियान की पूरी रणनीति और खुफिया जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती। लेकिन दूसरी ओर, यदि वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के सार्वजनिक बयानों से अलग-अलग तस्वीर बन रही है तो सरकार को कम से कम इतना स्पष्ट करना चाहिए कि ऑपरेशन सिंदूर में चीन और पाकिस्तान के सैन्य सहयोग का आकलन क्या था, क्योंकि युद्ध के बाद सिर्फ यह जानना पर्याप्त नहीं है कि भारत ने कितने लक्ष्य ध्वस्त किए। यह भी जरूरी है कि भारत की खुफिया व्यवस्था, एयर डिफेंस, हथियार प्रणालियों और दुश्मन की विदेशी सहायता का वास्तविक मूल्यांकन क्या रहा।
कांग्रेस का सीधा सवाल-कहानी क्यों बदल रही है?
जयराम रमेश ने आरोप लगाया है कि ऑपरेशन सिंदूर में चीन की भूमिका को लेकर पहले जो बातें सामने आई थीं और अब जो बयान दिए जा रहे हैं, उनमें अंतर दिखाई देता है। कांग्रेस इसे केवल बयानबाजी का मामला नहीं मान रही, बल्कि पूरे ऑपरेशन की संस्थागत समीक्षा की मांग कर रही है। कांग्रेस का तर्क है कि युद्ध जैसे गंभीर सैन्य अभियान के बारे में अलग-अलग समय पर सामने आ रहे ‘हेडलाइन बनानेवाले खुलासे’ पर्याप्त नहीं हैं। पार्टी ने कारगिल युद्ध के बाद बनी कारगिल समीक्षा समिति जैसी व्यापक समीक्षा की मांग की है।
