मुख्यपृष्ठनए समाचारफडणवीस ने सरनाईक के फैसले पर लगाई रोक

फडणवीस ने सरनाईक के फैसले पर लगाई रोक

-महायुति में फैसले को लेकर सियासी हलचल

सुनील ओसवाल / मुंबई
राज्य के परिवहन मंत्री तथा शिंदे गुट के नेता प्रताप सरनाईक के ऑटोरिक्शा चालकों को भाषा की अनिवार्यता की समयसीमा को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक साल बढ़ा दिया है। सरनाईक के पैâसले में मुख्यमंत्री स्तर पर बदलाव किए जाने से शिंदे गुट में बेचैनी की चर्चा है। इसे सहयोगी दल के मंत्री के निर्णय पर मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के तौर पर देखा जा रहा है।
परिवहन विभाग ने ऑटोरिक्शा चालकों के लिए भाषा सीखने को लेकर समयसीमा तय की थी। इस पैâसले के बाद भाषा के मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना थी। इसी बीच मुख्यमंत्री फडणवीस ने संबंधित चालकों को एक महीने की अतिरिक्त मोहलत देने का निर्णय लिया। इससे सरनाईक के मूल पैâसले में बदलाव हुआ है। महायुति सरकार में भाजपा और शिंदे गुट के बीच सत्ता का संतुलन पहले से ही राजनीतिक चर्चा का विषय रहा है। ऐसे में परिवहन विभाग से जुड़े पैâसले में मुख्यमंत्री द्वारा बदलाव किए जाने को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। शिंदे गुट के मंत्री के निर्णय को मुख्यमंत्री द्वारा नरम किए जाने से सरकार में निर्णय लेने के अधिकार और सहयोगी दलों के बीच समन्वय को लेकर सवाल उठ रहे हैं। राजनीतिक दृष्टि से भी यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री द्वारा समयसीमा बढ़ाए जाने से सरकार ने फिलहाल टकराव की स्थिति को टालने का रास्ता चुना है।
शिंदे गुट के ‘बैकफुट’ पर जाने की चर्चा
मुख्यमंत्री के निर्णय के बाद शिंदे गुट के भीतर असहजता की चर्चा है। पार्टी के मंत्री द्वारा लिए गए निर्णय में मुख्यमंत्री स्तर पर बदलाव होने से राजनीतिक संदेश को लेकर भी मंथन शुरू हो गया है। हालांकि, शिंदे गुट की ओर से इस मामले में आधिकारिक तौर पर नाराजगी सामने नहीं आई है। फिर भी सहयोगी दल के मंत्री के पैâसले को बदलने की घटना को महायुति के भीतर शक्ति-संतुलन के संदर्भ में देखा जा रहा है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या सरकार में महत्वपूर्ण नीतिगत पैâसलों पर अंतिम नियंत्रण मुख्यमंत्री कार्यालय का ही रहेगा।

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