मुख्यपृष्ठनए समाचारनेपाल और बांग्लादेश के रास्ते विदेश भेजी गई ५० लाख टन चीनी!

नेपाल और बांग्लादेश के रास्ते विदेश भेजी गई ५० लाख टन चीनी!

-भंडार को लेकर विपक्ष का बड़ा सवाल
– भाजपा सरकार से मांगा हिसाब

रामदिनेश यादव / मुंबई
देश में चीनी के सरकारी भंडार को लेकर एक गंभीर सवाल खड़ा हो गया है। सरकार द्वारा घोषित उत्पादन और उपलब्ध स्टॉक के आंकड़ों में भारी अंतर आया है। जिसके बाद सरकार के स्टॉक से गायब लगभग ५० लाख टन चीनी को विदेश भेजे जाने के आरोपों में मोदी सरकार घिर गई है। चीनी की एक बड़ी मात्रा कथित रूप से नेपाल और बांग्लादेश के रास्ते दूसरे देशों में भेजी गई है। सरकारी स्टॉक के आंकड़ों को देखें तो साफ नजर आता है कि लगभग ५० लाख टन चीनी गायब है। विपक्ष सीधे हिसाब मांग रहा है कि इतनी बड़ी मात्रा में चीनी कहां गई है।

विपक्ष का आरोप
चीनी कारोबारियों ने कर रखा है बड़ी मात्रा में भंडारण

विपक्ष का यह भी आरोप है कि चीनी कारोबार से जुड़े प्रभावशाली लोगों ने कथित तौर पर बड़ी मात्रा में चीनी का भंडारण कर रखा है। आरोप है कि कुछ स्टॉक देश में रोका गया, जबकि कुछ को कथित तौर पर पड़ोसी देशों के माध्यम से बाहर भेजा गया। विपक्ष का आरोप है कि चीनी के इस कथित अंतर की निष्पक्ष जांच कराने के बजाय सरकार पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए है।
जमा हुआ ३३० लाख टन, २२४ टन रिलीज हुआ, बाकी कहां?
विपक्ष द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के मुताबिक, पिछले वर्ष सरकार ने लगभग ४७ लाख टन चीनी का शुरुआती स्टॉक बताया था। इसके बाद उत्पादन करीब २९१ लाख टन से अधिक हुआ। इस तरह कुल उपलब्धता लगभग ३३८ लाख टन बैठती है। इसमें से करीब ८ लाख टन चीनी निर्यात किए जाने की जानकारी दी गई। इसके बाद भी लगभग ३३० लाख टन चीनी स्टॉक में बची। सरकार ने इस वर्ष अब तक करीब २२४.७ लाख टन चीनी रिलीज की है। इस हिसाब से लगभग ८० लाख टन चीनी का स्टॉक बचना चाहिए था। लेकिन अब सरकार की ओर से उपलब्ध स्टॉक करीब ३० लाख टन से अधिक बताया जा रहा है। ऐसे में करीब ५० लाख टन चीनी के कथित अंतर को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
अगर कमी है तो बाजार में हाहाकार क्यों नहीं?
विपक्ष ने सरकार के सामने सबसे बड़ा सवाल खड़ा करते हुए कहा कि यदि वास्तव में देश में चीनी का गंभीर संकट है तो बाजार में इसकी व्यापक कमी क्यों दिखाई नहीं दे रही? दुकानों पर चीनी के लिए लंबी कतारें या मारामारी जैसी स्थिति नजर नहीं आ रही है।
विपक्ष ने भाजपा सरकार से मांग की है कि चीनी के उत्पादन, सरकारी स्टॉक, रिलीज और निर्यात का पूरा हिसाब सार्वजनिक किया जाए। साथ ही कथित ४५ लाख टन के अंतर की उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।

अन्य समाचार