मुख्यपृष्ठस्तंभनेपाल में हिमखंड टूटा मौत बनकर दौड़ी नदी

नेपाल में हिमखंड टूटा मौत बनकर दौड़ी नदी

-१६० से अधिक मौतें, ८४४ लोग लापता;
-१३३ भारतीयों का भी पता नहीं, वैâलाश मानसरोवर यात्री फंसे
-तिब्बत से निकला बर्फ-चट्टानों का सैलाब;
-भारत ने भेजी राहत, बिहार-पूर्वी यूपी में भी बढ़ी चिंता

नेपाल के उत्तरी हिस्से में बुधवार को अचानक आई विनाशकारी बाढ़ ने तबाही का ऐसा निशान छोड़ा है, जिसका पूरा पैमाना अभी सामने आना बाकी है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, नेपाल में कम से कम १६० लोगों की मौत हो चुकी है और ८४४ लोगों के लापता होने की सूचना है। इनमें कम से कम १३३ भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक और वैâलाश मानसरोवर यात्रा पर निकले श्रद्धालु भी संपर्क से बाहर हैं। नेपाल पुलिस के पहले आंकड़ों में १५७ मौतें दर्ज थीं, इसलिए मृतकों और लापता लोगों की संख्या लगातार बदल रही है।
तबाही का केंद्र भोटे कोशी और त्रिशूली नदी घाटी रही। अचानक कई मीटर ऊंचे पानी, बर्फ, पत्थर और मलबे ने बस्तियों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं को चंद मिनटों में तहस-नहस कर दिया। शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, कम से कम १९ पुल और करीब ४० किलोमीटर सड़क क्षतिग्रस्त या बह गई है, जबकि १३ जलविद्युत परियोजनाओं पर भी असर पड़ा। दूर-दूर तक शव मिलने से बाढ़ की रफ्तार और भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
सबसे चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण यूएसजीएस के विश्लेषण ने शुरुआती भूकंप संबंधी आशंकाओं को पीछे छोड़ते हुए संकेत दिया कि तबाही की असली वजह विशाल ग्लेशियर का टूटना और उसके साथ चट्टाननों का भारी मलबा का नीचे गिरना था। इस भूस्खलन-जैसी घटना ने नदी में अचानक भारी मात्रा में पानी और मलबा धकेला और कुछ ही समय में प्रचंड फ्लैश फ्लड पैदा हो गई।
सीमा के दूसरी ओर चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी तीन लोगों की मौत और २६५ लोगों के लापता होने की खबर है। नेपाल में लापता विदेशियों में भारतीयों की संख्या सबसे अधिक बताई जा रही है। कई यात्री नेपाल-तिब्बत सीमा पार करने की तैयारी में थे, तभी सैलाब ने रास्ता काट दिया।
भारत ने संकट की घड़ी में तत्काल मदद बढ़ाई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से बात कर हरसंभव सहायता का भरोसा दिया। भारतीय वायुसेना के सी-१३०जे विमान से करीब १० टन राहत सामग्री, जिसमें दवाएं, अस्थायी आश्रय, कंबल, स्वच्छता किट और सोलर लैंप शामिल हैं, नेपाल भेजे गए हैं।
नेपाल की इस आपदा ने भारत के सीमावर्ती इलाकों की चिंता भी बढ़ा दी है। नेपाल से आने वाली नदियों के बढ़ते प्रवाह को देखते हुए बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में नदी स्तर पर निगरानी बढ़ाना अहम हो गया है। खासकर गंडक-नारायणी बेसिन में किसी भी तेज जलप्रवाह का असर निचले भारतीय क्षेत्रों तक पहुंच सकता है।
८४४ लापता, आंकड़ों में फर्क क्यों?
नेपाल पुलिस, पर्यटन विभाग और अलग-अलग एजेंसियों के आंकड़े अभी एक-दूसरे से पूरी तरह मेल नहीं खा रहे हैं। कुछ रिपोर्टों में ५७९ पर्यटक/विदेशी संपर्क से बाहर बताए गए हैं, जबकि व्यापक प्रशासनिक आंकड़ा ८४४ तक पहुंचा है। इसलिए अंतिम संख्या बचाव अभियान आगे बढ़ने के साथ बदल सकती है।
हिमालय से फिर खतरे की घंटी
नेपाल की त्रासदी सिर्फ एक प्राकृतिक दुर्घटना नहीं, बल्कि हिमालयी क्षेत्र की बढ़ती संवेदनशीलता की चेतावनी भी है। ग्लेशियर टूटना, भूस्खलन, ग्लेशियल झीलों का फटना और संकरी नदी घाटियों में तेजी से निर्माण-इन सबका मेल भविष्य में ऐसी आपदाओं की मार और बढ़ा सकता है।
नेपाल आपदा में भारतीयों को लेकर बढ़ी चिंता
विदेश मंत्रालय के अनुसार २८८ भारतीय नागरिकों से फिलहाल संपर्क नहीं हो पा रहा है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इन्हें अभी मृत या निश्चित रूप से लापता नहीं माना जा सकता, क्योंकि कई क्षेत्रों में सड़क और संचार व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित है। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में अचानक आई बाढ़ और मलबे ने हालात गंभीर कर दिए हैं। भारत सरकार ने संबंधित राज्यों से नेपाल गए नागरिकों की जानकारी मांगी है और दूतावास के जरिए संपर्क तथा बचाव प्रयास तेज किए हैं। संख्या में आगे बदलाव संभव है।
चीन ने दी चेतावनी,
कहा- अगले ७२ घंटे अहम
नेपाल में भीषण बाढ़ से मची तबाही के बीच एक और बड़े खतरे की चेतावनी सामने आई है। चीन के जल संसाधन मंत्रालय के अनुसार, नेपाल में छोछेन खोला और पुरेपू त्सांगपो नदियों के संगम के पास करीब २० लाख घन मीटर पानी वाली एक बड़ी झील बन गई है। झील पहले ही छलकने लगी है और अगले तीन दिनों में इसमें करीब ३० लाख घन मीटर और पानी आने का अनुमान है।

अन्य समाचार