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सोना, सीएनजी, एलपीजी, पेट्रोल-डीजल के बाद … अब महंगी होगी बिजली! …उपभोक्ताओं को लगेगा करंट का झटका!

सरकार बढ़ाने जा रही फिक्स इलेक्ट्रिक चार्ज
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
अगर आप अपने घर का बिजली बिल कम करने के लिए पंखे, एसी और लाइटें बंद करके बचत करने की सोच रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। आनेवाले समय में आपकी यह रणनीति शायद काम न करे। जी हां, क्योंकि केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने देशभर में बिजली टैरिफ के ढांचे में एक बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है। इस नए प्रस्ताव के अनुसार, आपके बिजली बिल में लगनेवाला ‘फिक्स्ड चार्ज’ काफी बढ़ा दिया जाएगा। इसका सीधा मतलब यह है कि भले ही आप कम बिजली खर्च करें या बिल्कुल न करें, आपको हर महीने एक तय मोटी रकम तो चुकानी ही होगी।

क्यों लिया जा रहा है यह पैâसला?
सरकारी बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति को सुधारने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। वर्तमान में बिजली कंपनियां अपना ज्यादातर खर्च आपके द्वारा इस्तेमाल की जानेवाली प्रति-यूनिट बिजली से वसूलती हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, सीईए का कहना है कि बिजली कंपनियों का ट्रांसमिशन इंप्रâास्ट्रक्चर, कर्मचारियों की सैलरी, ग्रिड का मेंटेनेंस और बिजली बनानेवाली कंपनियों को किया जानेवाला भुगतान कुल खर्च का ३८ प्रतिशत से ५६ प्रतिशत तक होता है, लेकिन वर्तमान में फिक्स्ड चार्ज के जरिए वे केवल ९ प्रतिशत से २०प्रतिशत खर्च ही वसूल पाती हैं। जब देश में बिजली की मांग घटती है तो इन कंपनियों को भारी घाटा होने लगता है।
रूफटॉप सोलर लगानेवालों ने बढ़ाई टेंशन
बिजली कंपनियों के घाटे का एक बड़ा कारण यह भी है कि अमीर परिवार और बड़ी-बड़ी इंडस्ट्रीज अब अपने घरों और पैâक्ट्रियों में रूफटॉप सोलर सिस्टम या खुद के पावर प्रोजेक्ट्स लगा रहे हैं। ये लोग सीधे ग्रिड से बिजली खरीदना तो कम या बंद कर देते हैं, जिससे कंपनियों की प्रति-यूनिट से होनेवाली कमाई घट जाती है, लेकिन ये उपभोक्ता बैकअप या इमरजेंसी के लिए सरकारी बिजली ग्रिड से जुड़े रहते हैं। अब ग्रिड को चालू रखने और तारों का जाल बनाए रखने का खर्च तो कंपनियों को उठाना ही पड़ता है। इसीलिए कंपनियों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।

नए प्रस्ताव से आपकी जेब पर क्या होगा असर?
सीईए ने चरणबद्ध तरीके से फिक्स्ड चार्ज बढ़ाने का रोडमैप तैयार किया है।
घरेलू और कृषि उपभोक्ता:- साल २०३० तक आपके कुल बिजली बिल में फिक्स्ड कॉस्ट की वसूली को बढ़ाकर २५ प्रतिशत करने का प्रस्ताव है।
इंडस्ट्रियल और कमर्शियल उपभोक्ता:- पैâक्ट्रियों, दुकानों और संस्थानों के लिए इसे सीधे १०० प्रतिशत करने की सिफारिश की गई है।
सोलर यूजर्स के लिए अलग नियम:- अपने घर पर सोलर पैनल लगानेवाले या नेट-मीटरिंग का इस्तेमाल करनेवाले ग्राहकों के लिए एक अलग बिलिंग ढांचा तैयार किया जाएगा यानी उन्हें भी ज्यादा फिक्स्ड चार्ज देना पड़ सकता है।

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