-सालों बाद दर्ज हुआ था केस
सुरेश गोलानी / मुंबई
फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी से संबंधित एक मामले में एफआईआर दर्ज होने के तीन महीनों बाद आखिरकार मीरा-भायंदर, वसई-विरार पुलिस आयुक्तालय की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने बिल्डर उमराव सिंह ओस्तवाल को शनिवार देर रात गिरफ्तार कर लिया। मेसर्स श्री ओस्तवाल बिल्डर्स लिमिटेड के मालिक उमराव सिंह सहित कुलदीप सिंह ओस्तवाल और चार अन्य लोगों पर नया नगर पुलिस स्टेशन में मई २०२५ में मामला दर्ज हुआ था। ओस्तवाल के खिलाफ कई पुलिस स्टेशनों में कुल १३ मामले दर्ज हैं।
आरोपियों द्वारा निर्मित ओस्तवाल पैराडाइस (बिल्डिंग क्रमांक ६) की हाउसिंग सोसायटी के सचिव पद पर कार्यरत शिकायतकर्ता रंजीत झा के पुलिस को दिए बयान के अनुसार, आरोपी बिल्डर ने २००६ में फ्लैट के विक्री एग्रीमेंट में अपने लेआउटट में चार रिहायशी और एक शॉपिंग सेंटर की जानकारी दी और सन २००८ में चार अलग हाउसिंग सोसायटी का पंजीकरण करवाया।
ये मामला २०१५ में तब सामने आया, जब सोसायटी के पदाधिकारी अपनी इमारतों का डीम्ड कंन्वेयेंस हेतु दस्तावेज इकठा करने लगे। पता चला कि बिल्डर ने न सिर्फ तीन मंजिलों का अवैध निर्माण किया था, बल्कि सोसायटी की मंजूरी लिए बिना फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पॉटेंशियल (एक्स्ट्रा) फ्लोर स्पेस इंडेक्स का दुरुपयोग कर एक और इमारत (क्र ९) का निर्माण शुरू कर दिया। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस मामले में विस्तृत जांच जारी है। कल ओस्तवाल को कोर्ट में हाजिर किया गया, कोर्ट ने दो दिन के लिए पुलिस कस्टडी में भेजा।
क्या ईडी करेगी जांच?
ज्ञात हो कि इससे पहले भी ओस्तवाल बिल्डर पर अवैध निर्माण करने के अलावा कई मामले पुलिस थानों में दर्ज हैं। सही दिशा में जांच ओस्तवाल बिल्डर द्वारा किए गए करोड़ों की धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े का पिटारा खोल सकती है। सामाजिक कार्यकर्ताओं और धोखाधड़ी के शिकार लोगों ने वसई-विरार की तरह इस मामले में भी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा जांच किए जाने की मांग की है। आरोप है कि ओस्तवाल के अलावा शहर में कई ऐसे बिल्डर हैं, जो सियासी दलों के संरक्षण और वरदहस्त के बल पर अपने काले कारनामों को बेखौफ अंजाम देकर भोले-भाले लोगों को धोखा दे रहे हैं।
बिल्डर पर मनपा भी एक्शन ले
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि बिल्डर ने फर्जी सुधारित निर्माणकार्य अनुमति और जाली नक्शे बनाकर न सिर्फ मीरा-भायंदर महानगरपालिका के साथ धोखाधड़ी की अवैध फ्लैट्स को बेचकर खरीदारों को दो करोड़ रुपयों का भी चूना लगाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए मनपा के नगर नियोजन विभाग (टाउन प्लैनिंग डिपार्टमेंट) को भी कड़े कदम उठाकर बिल्डर के खिलाफ कार्रवाई करते हुए ब्लैक्लिस्ट करने की मांग जोर पकड़ रही है।
