१ लाख पेड़ लगाने का कागजी लक्ष्य
दृप्ति झा / मुंबई
मुंबई मनपा एक बार फिर धरातल से दूर, बड़े-बड़े वादों की झोली लेकर सामने आई है। शहर में लगातार कटते पेड़ों और कंक्रीट के जंगल में बदलती मुंबई के बीच, मेयर रितु तावड़े ने आने वाले दिनों में कम से कम १ लाख पेड़ लगाने का एक और महत्वाकांक्षी लक्ष्य घोषित कर दिया है। १६ जून को हुई मनपा की बैठक में हमेशा की तरह खाली जमीन, फ्लाईओवर के नीचे और सड़कों के किनारों को हरा-भरा करने के हवाई दावे तो किए गए, लेकिन पेड़ों के रखरखाव को लेकर प्रशासन के पास कोई ठोस जवाब नहीं है।
तथाकथित पर्यावरण सुधार की समीक्षा के लिए बुलाई गई इस बैठक में अधिकारियों की भारी भरकम फौज मनपा आयुक्त से लेकर सातों जोनों के उपायुक्त तो मौजूद थे, लेकिन योजना में गंभीरता कम और लीपापोती ज्यादा नजर आई।
पुरानी रणनीतियों का रीपैकेजिंग
मेयर ने दावा किया है कि विश्व पर्यावरण दिवस से शुरू हुए अभियान को तेज किया जाएगा। इसके लिए उन्होंने वर्टिकल गार्डन और विलेपार्ले में हुए अर्बन फार्मिंग जैसे गिने-चुने प्रयोगों का हवाला देकर अपनी पीठ थपथपाई। लेकिन हकीकत यह है कि मुंबई में पहले लगाए गए वर्टिकल गार्डन रखरखाव के अभाव में सूख चुके हैं। प्रशासन अब खुद जिम्मेदारी लेने के बजाय डेवलपर्स, उद्योगपतियों और एनजीओ के भरोसे अपनी नैया पार लगाने की फिराक में है, जिसे जनभागीदारी का नाम दिया जा रहा है।
डिप्टी मेयर ने भी किया स्वीकार
खुद डिप्टी मेयर संजय घाड़ी ने बैठक में माना कि पेड़ों के जीवित रहने को लेकर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। यह साफ दर्शाता है कि प्रशासन को खुद भरोसा नहीं है कि ये १ लाख पौधे कभी पेड़ बन भी पाएंगे या नहीं। प्रदूषण से हांफती मुंबई को इस समय घने, ऑक्सीजन देने वाले बड़े छायादार पेड़ों की जरूरत है।
