-आईटी प्रमुख सीमा खन्ना पर फिर बिठाई निगरानी; दो चुनाव आयुक्तों की आपत्ति के बाद बदली व्यवस्था
-मतदाता सूची पर डिजिटल नियंत्रण को लेकर गंभीर सवाल; सॉफ्टवेयर के आगे बेबस थे निर्वाचन अधिकारी?
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
केंद्रीय चुनाव आयोग में आईटी विभाग के अधिकारों को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर गरमा गया है। आयोग ने नए आदेश के जरिए महानिदेशक (आईटी) सीमा खन्ना को वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त पवन कुमार शर्मा की निगरानी में काम करने का निर्देश दिया है। अब आईटी और आईसीटी से संबंधित फाइलें सीधे आयोग के सामने नहीं जाएंगी, बल्कि वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त के माध्यम से भेजी जाएंगी।
रिपोर्ट के अनुसार, २८ जुलाई को तत्कालीन वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग ने आईटी विभाग को उप चुनाव आयुक्त संजय कुमार की निगरानी से हटाकर सीधे सीमा खन्ना के अधीन कर दिया था। इस फैसले पर चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने गंभीर आपत्ति जताई थी। दोनों ने कैबिनेट सचिव को पत्र लिखकर आयोग की सामूहिक मंजूरी के बिना कार्य-विभाजन बदलने पर सवाल उठाए थे। हालांकि चुनाव आयोग का दावा है कि जुलाई का विवादास्पद आदेश कभी लागू ही नहीं हुआ। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि पुरानी व्यवस्था कायम थी, तो नया आदेश जारी करने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
मतदाता सूची पर सॉफ्टवेयर का पहरा!
विवाद का सबसे गंभीर पहलू ECINet और ERONet से जुड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ERध्) ने शिकायत की थी कि सॉफ्टवेयर प्रतिबंधों के कारण वे मतदाता सूची में संशोधन संबंधी अपने वैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे थे। इससे निर्वाचन प्रक्रिया के केंद्रीकरण की आशंका पैदा हुई। गोवा के एक मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी ERONet की तकनीकी बाधाओं के बीच एक परिवार के छह सदस्यों के नाम मतदाता सूची में बहाल करने का आदेश दिया। आयोग ने डिजिटल व्यवस्था की समीक्षा और नए आईटी मॉड्यूल की मंजूरी प्रक्रिया में निगरानी बढ़ाने के कदम उठाए हैं। लेकिन मूल प्रश्न कायम है कि मतदाता सूची पर अंतिम नियंत्रण कानून के तहत नियुक्त अधिकारियों का है या सॉफ्टवेयर संचालित करने वाले अधिकारियों का?
दो चुनाव आयुक्तों ने क्यों जताई आपत्ति?
२८ जुलाई को आईटी विभाग की वरिष्ठ स्तर की निगरानी हटाने का आदेश जारी हुआ।
२९ जुलाई को चुनाव आयुक्त संधू और जोशी ने कैबिनेट सचिव को पत्र लिखा।
३० जुलाई को पुरानी कार्य-विभाजन व्यवस्था जारी रखने का निर्देश दिया गया।
आयोग का दावा है कि विवादास्पद आदेश लागू ही नहीं हुआ।
४ नवंबर को नए आदेश में वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त की निगरानी स्पष्ट की गई।
चुनाव आयोग के सामने पांच बड़े सवाल
१. आईटी विभाग को सीधे आयोग से जोड़ने का आदेश किसकी मंजूरी से जारी हुआ?
२. क्या ECINet और ERONet के प्रतिबंधों ने निर्वाचन अधिकारियों के वैधानिक अधिकार प्रभावित किए?
३. सॉफ्टवेयर में बदलाव का अधिकार किस अधिकारी के पास था?
४. तकनीकी प्रतिबंधों से कितने मतदाताओं के आवेदन प्रभावित हुए?
५. क्या डिजिटल प्रणाली के स्वतंत्र ऑडिट की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी?
