-पूर्व मुख्य न्यायाधीश भूषण गवई ने प्रस्तावित संशोधन पर जताई कानूनी आपत्ति
-मुख्यमंत्री फडणवीस बोले, पूरी जानकारी नहीं दी गई थी
सामना संवाददाता / मुंबई
कोल्हापुर की गोकुल डेयरी के चुनाव में कांग्रेस समर्थित पैनल को बहुमत मिलने के बाद महाराष्ट्र सरकार के सहकारी कानून में बदलाव के पैâसले ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। अब खुलासा हुआ है कि पूर्व प्रधान न्यायाधीश भूषण गवई ने प्रस्तावित संशोधन के खिलाफ कानूनी राय दी थी। इसके बावजूद राज्य मंत्रिमंडल ने चार सरकारी नामित सदस्यों को मतदान अधिकार देने वाला संशोधन मंजूर किया।
गोकुल डेयरी की २५ निर्वाचित सीटों में कांग्रेस नेता सतेज पाटील समर्थित पैनल ने १३ और महायुति ने १२ सीटें जीती हैं। अध्यक्ष चुनाव के लिए १४ सदस्यों की उपस्थिति जरूरी है। महायुति समर्थित सदस्य अनुपस्थित रहे, जिससे बैठक नहीं हो सकी। हाई कोर्ट ने १० नवंबर को दोबारा बैठक बुलाने का निर्देश दिया है।
मंत्रिमंडल के निर्णय के अनुसार ५०० करोड़ रुपए से अधिक कारोबार वाली सरकारी सहायता प्राप्त सहकारी संस्थाओं में पांच सरकारी प्रतिनिधि नियुक्त किए जा सकेंगे। इनमें चार को मतदान अधिकार मिलेगा। यदि ये चार सदस्य महायुति समर्थित पैनल के पक्ष में मतदान करते हैं, तो उसका आंकड़ा १६ तक पहुंच सकता है। पूर्व सीजेआई भूषण गवई ने अपनी कानूनी राय में कहा कि लंबित न्यायिक प्रक्रिया के दौरान ऐसा संशोधन न्यायिक कार्यवाही में हस्तक्षेप और शक्तियों के अनुचित इस्तेमाल का प्रश्न खड़ा कर सकता है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जवाब दिया कि गवई को राय मांगते समय अध्यक्ष चुनाव के लिए आवश्यक गणपूर्ति से संबंधित पूरी जानकारी नहीं दी गई थी।
