मुख्यपृष्ठनए समाचारमनपा की ‘फराल सखी' योजना पर लगा ब्रेक!

मनपा की ‘फराल सखी’ योजना पर लगा ब्रेक!

नीति आयोग के मंच से देश को ‘ज्ञान’ बांटने वाली मीरा-भायंदर मनपा का खुद का किचन ठप; ठीकरा महिला बचत समूहों पर फोड़ा!
सुरेश गोलानी / मुंबई
महिला सशक्तीकरण और आत्मनिर्भरता के बड़े-बड़े दावे करने वाले मीरा-भायंदर मनपा प्रशासन की पोल इस दिवाली खुल गई है। जिस ‘फराल सखी’ उपक्रम को पिछले साल नीति आयोग ने राष्ट्रीय स्तर पर सराहा था, वह इस साल दिवाली के ऐन मौके पर पूरी तरह बंद हो गया। प्रशासन और महिला बचत समूहों के बीच तालमेल की कमी और प्रशासनिक ढुलमुल रवैये से योजना धराशायी हो गई, जिससे कामकाजी महिलाओं को भारी झटका लगा है।
बता दें कि शहर की महिलाओं को स्थायी रोजगार व बाजार देने के उद्देश्य से यह महत्वाकांक्षी योजना शुरू की गई थी। पिछले साल महिलाओं ने करीब ३ टन दिवाली फराल की रिकॉर्ड बिक्री की थी, जिसकी गूंज दिल्ली तक पहुंची थी। सफलता को देखते हुए मनपा ने मीरा रोड में एक विशेष सेंट्रल किचन भी तैयार किया था, ताकि इसे ब्रांड बनाकर सालभर चलाया जा सके। लेकिन इस दिवाली वह किचन महिलाओं की उम्मीदों के बजाय प्रशासन की नाकामी का स्मारक बनकर रह गया। योजना बंद होने के पीछे सबसे बड़ी वजह आधुनिक बाजार और डिजिटल मार्केटिंग की समझ न होना रही। जब हर छोटा-बड़ा ब्रांड ऑनलाइन डिलीवरी और सोशल मीडिया से आगे बढ़ रहा है, तब मनपा ‘फराल सखी’ के उत्पादों के लिए कोई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तैयार नहीं कर पाई। बाजार की कड़ी प्रतिस्पर्धा में महिलाओं को आर्थिक लाभ न दिखने पर इस साल कोई भी बचत समूह आगे नहीं आया।
मनपा आयुक्त मौन!
मनपा आयुक्त राधा बिनोद शर्मा ने इस पर मौन बनाए रखा, लेकिन सूत्रों के अनुसार प्रशासन अपनी विफलता छिपाने के लिए अब बचत समूहों पर ही रिस्पॉन्स न देने का ठीकरा फोड़ रहा है। सवाल है कि जब उपक्रम देशभर में नाम कमा चुका था, तो अधिकारियों ने समय रहते महिलाओं को प्रशिक्षित करने और बाजार की चुनौतियों से निपटने के कदम क्यों नहीं उठाए।

 

 

अन्य समाचार