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जेल में गांधी परीक्षा टॉपर बना अरुण गवली …जमानत पर रिहाई के बाद पहुंचा दगड़ी चाल

सुनील ओसवाल / फिरोज खान / मुंबई
मुंबई की गलियों में कभी जिसके नाम से खौफ का साया छा जाता था, वही कुख्यात अंडरवर्ल्ड डॉन अरुण गवली उर्फ डैडी अब गांधीगीरी की राह पर चलता नजर आ रहा है। नागपुर सेंट्रल जेल में आयोजित गांधी विचार परीक्षा में गवली ने ८० में से ७४ अंक हासिल कर पहला स्थान झटक लिया। भाईगीरी से गांधीगीरीr तक का यह सफ़र किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं लग रहा। जिस डॉन ने मुंबई के अंडरवर्ल्ड में दहशत फैलाई थी, वही अब गांधीजी के आदर्शों पर आधारित परीक्षा में टॉपर बन गया।

दाऊद इब्राहिम से अलग होने के बाद अपना अलग गैंग बनाने वाले अरुण गवली १७ साल बाद जमानत पर रिहा हो गया है। भायखला स्थित दगडी चाल पहुुंचते ही डैडी के पंटरों ने उसका जोरदार स्वागत किया। इस मौके पर बेटी गीता गवली भी दिखाई दी। अरुण गवली की रिहाई के बाद इस बात को लेकर चर्चा गरम है कि गवली को बीएमसी चुनाव से पहले बेल मिल गई है। रोचक बात यह है कि गवली को मुंबई में २००७ में हुए बीएमसी चुनाव के बाद जेल हुई थी और १७ साल बाद २०२५ के चुनाव से पहले बेल मिल गई है।

१८ साल बाद जेल से बाहर आया गवली
-शिवसेना नगरसेवक की हत्या में मिली थी उम्रकैद

मुंबई का कुख्यात डॉन और पूर्व विधायक अरुण गवली उर्फ डैडी आखिरकार १८ साल बाद जेल से बाहर आया। सुप्रीम कोर्ट से जमानत मंजूर होने के बाद बुधवार को नागपुर सेंट्रल जेल से उसकी रिहाई हुई और वह सीधे मुंबई के लिए रवाना हुआ।
डॉन से गांधीगीरी तक का सफर
शिवसेना नगरसेवक की हत्या केस में उमवैâद की सजा काट रहे गवली ने नागपुर जेल में आयोजित गांधी विचार परीक्षा में ८० में से ७४ अंक झटक लिए। इस परीक्षा में १५९ बंदियों ने हिस्सा लिया, लेकिन ‘डैडी’ टॉपर निकला। हाई-सिक्योरिटी ‘अंडा सेल’ में बंद रहते हुए गवली ने मराठी भाषा में यह ओपन-बुक एग्जाम दिया।
जेल प्रशासन ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर यह परीक्षा आयोजित की थी, जिसमें १६० बंदियों ने हिस्सा लिया। गवली को भी गांधी विचारों पर आधारित साहित्य दिया गया था। उसने न केवल मन लगाकर पढ़ाई की, बल्कि सवालों के जवाब भी इस कदर लिखे कि वह अव्वल घोषित हुआ। मुंबई का वही ‘डॉन’, जो कभी खून-खराबे और दहशत का दूसरा नाम था, अब गांधी टोपी पहनकर गांधीजी के विचार लिख रहा है।
असली बदलाव है या सिर्फ छवि सुधारने का हथकंडा?
ठीक वैसे ही जैसे फिल्मी ‘मुन्नाभाई’ गांधीगीरीr पर चल पड़ा थाक्या ‘डैडी’ गवली भी बदलेगा? एक तरफ १८ साल बाद जेल से रिहाई और दूसरी तरफ गांधी विचारों में टॉपर बनने का दावा कर अरुण गवली ने फिर सुर्खियों में वापसी कर ली है। अब पूरा देश देख रहा है कि ‘डॉन से गांधीगीरी’ तक का यह सफर आगे कहां ले जाएगा।
चिंचपोकली विधानसभा क्षेत्र से बना विधायक
अरुण गवली २००४ में चिंचपोकली विधानसभा क्षेत्र से विधायक बना था और विधायक का कार्यकाल २००४ से २००९ तक था। बता दें कि फरवरी २००७ में बीएमसी चुनाव हुए थे और नगरसेवक कमलाकर जामसांंडेकर की हत्या २ मार्च २००७ को घाटकोपर में हुई थी। जामसांडेकर हत्या मामले में अरुण गवली गिरफ्तार हुआ था। गवली को ट्रायल कोर्ट और मुंबई हाई कोर्ट ने उम्रवैâद की सजा सुनाई थी। ९ दिसंबर २०१९ को गवली ने इस पैâसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिस पर सुनाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने २८ अगस्त को गवली की जमानत पर मुहर लगा दी। पुलिस के बढ़ते दबाव और गैंगवार से बचने के लिए गवली ने राजनीति में कदम रखा और अखिल भारतीय सेना नामक पार्टी बनाई।

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