रवीन्द्र मिश्रा / मुंबई
श्रावण महिना भगवान शिव का प्रिय महीना माना जाता है। शास्त्रों में वर्णित इसी महीने में भगवान शिव समुद्र मंथन से निकले विष को अपने कंठ में धारण किया था। उसी विष के तेज को शांत करने के लिए भक्तों द्वारा शिवलिंगों पर हमेशा जलाभिषेक किया जाता है।इसी तरह दक्षिण मुंबई के नलबाजार स्थित नागेश्वर नाथ मंदिर में श्रावण मास में प्रतिदिन रात को रुद्राभिषेक किया जाता है। नागेश्वरनाथ मंदिर ट्रस्ट के सदस्य संदीप विभूते बताते हैं कि यहां का शिवलिंग स्वयंभू होने के चलते इसमें भक्तों की आस्था बहुत अधिक है। इस लिए यहां भक्तों की हमेशा भीड़ लगी रहती है। खासकर श्रावण महिना तथा महाशिवरात्रि पर यहां का नजारा कुछ और ही होता है । मंदिर निर्माण तथा नागेश्वरनाथ के विषय में शिव भक्त विकास मयकर बताते हैं कि 15वीं16वीं शताब्दी में जब अंग्रेज समुद्र मार्ग से हिंदुस्तान आए तो उन्होंने मुंबई का विस्तार करने के लिए सड़क निर्माण करना चाहा।जब वे चौपाटी से लेकर डोंगरी तक के लिए बनाए जा रहे सड़क की खुदाई कर रहे थे तो उन्हें उस खुदाई के दौरान वहां एक स्वयंभू शिवलिंग दिखाई दिया। वे उस शिव लिंग को वहां से हटाना चाहते थे। लेकिन जब भी मजदूर खुदाई करने के लिए फावड़ा चलाते वहां भारी संख्या में नाग आ जाते और वे फुंफकार मारने लगते।इस दृश्य को देखकर ब्रिटिश हुकूमत के लोग डर गये ।लोगों ने उन्हें समझाया कि यह स्वयंभू शिवलिंग है। नाग भोलेनाथ के कंठ के श्रृंगार हैं और वे हमेशा उनके साथ रहते हैं। शिव भक्त इस स्वयंभू लिंग को वहां से हटाने का विरोध कर रहे थे।मुंबई करों के विरोध के चलते ब्रिटिश प्रशासन को अपना निर्णय बदलने पर मजबूर होना पड़ा। और 1911 में ब्रिटिश गवर्नर जार्ज पंचम ने मंदिर के चारों ओर गोलाकार चबूतरा बनवाने का निर्णय लिया। मंदिर के दोनों ओर सड़क का निर्माण कर वहां एक गोल चबूतरे का निर्माण किया गया जो आज गोलदेवल के नाम से प्रसिद्ध है। स्वयंभू शिवलिंग को वहां मिलने तथा सांपों के उपद्रव के चलते यह शिवलिंग नागेश्वरनाथ के नाम से प्रतिष्ठित है। यह मंदिर सुबह 5बजकर 30 मिनट पर काकड़ आरती के साथ खुलता है तथा रात शयन आरती के साथ बंद हो जाता है। भक्तों का मानना है कि भगवान शिव केवल बाहरी शत्रुओं का ही दमन नहीं करते बल्कि मनुष्य के भीतर काम, क्रोध अहंकार,अज्ञान,भय आदि को दूर करते हैं। इसलिए शिवभक्त सर्वव्यापी करुणामय कल्याणकारी शिव की हमेशा आराधना करते रहते हैं।
