मुख्यपृष्ठस्तंभमंगल पर इंसान के साथ पहुंचेंगे अरबों ‘बिन बुलाए मेहमान’!

मंगल पर इंसान के साथ पहुंचेंगे अरबों ‘बिन बुलाए मेहमान’!

-वैज्ञानिकों की चेतावनी-अंतरिक्ष यात्रियों के शरीर में छिपे सूक्ष्मजीव बिगाड़ सकते हैं एलियन जीवन की खोज
मंगल ग्रह पर इंसान भेजने की तैयारी में जुटी अंतरिक्ष एजेंसियों के सामने एक ऐसा अदृश्य खतरा खड़ा हो गया है, जिसे न रॉकेट की स्क्रीन पकड़ सकती है और न अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी पर छोड़ सकते हैं। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि मंगल पर कदम रखने वाले पहले इंसानों के साथ उनके शरीर में रहने वाले अरबों-खरबों बैक्टीरिया भी वहां पहुंचेंगे। ये पृथ्वी के सूक्ष्मजीव मंगल पर जीवन की खोज को भ्रमित करने के साथ अंतरिक्ष यात्रियों के स्वास्थ्य के लिए भी खतरा बन सकते हैं।
मानव शरीर अपने आप में एक चलता-फिरता पारिस्थितिकी तंत्र है। त्वचा, मुंह, फेफड़ों और आंतों में बड़ी संख्या में सूक्ष्मजीव रहते हैं। केवल एक वयस्क व्यक्ति की आंत में ही करीब १०० ट्रिलियन सूक्ष्मजीव हो सकते हैं। अंतरिक्ष यात्री चाहे कितने भी साफ-सुथरे वातावरण में रहें, इन जैविक साथियों से पूरी तरह छुटकारा पाना संभव नहीं है।
मंगल का जीवन या पृथ्वी का बैक्टीरिया?
सबसे बड़ी चिंता यह है कि मंगल पर पहुंचा कोई पृथ्वी का जीवाणु वहां के नमूनों में मिल गया तो वैज्ञानिक उसे गलती से बाहरी जीवन का प्रमाण मान सकते हैं। इससे वर्षों की खोज और अरबों डॉलर के मिशन पर सवाल उठ सकते हैं। कुछ सूक्ष्मजीव मंगल के प्राकृतिक वातावरण को भी बदल सकते हैं, जिससे वहां मौजूद संभावित स्थानीय जीवन या उसके प्राचीन संकेत नष्ट हो सकते हैं।
नीदरलैंड की रेडबाउड यूनिवर्सिटी में किए गए शोध में पृथ्वी के सूक्ष्मजीवों को मंगल जैसे कम वायुदाब, भीषण ठंड, तीव्र विकिरण और अत्यधिक सूखे वातावरण में परखा गया। कई बैक्टीरिया अलग-अलग कठिन परिस्थितियों को सहने में सफल रहे, लेकिन सभी स्थितियों के संयुक्त प्रभाव में अधिकांश खुले बैक्टीरिया नष्ट हो गए। इसके बावजूद स्पेस सूट, मानव आवास और उपकरणों के भीतर सुरक्षित सूक्ष्म वातावरण में उनके जीवित रहने की आशंका बनी रहती है।
अंतरिक्ष यात्रियों की प्रतिरोधक क्षमता भी पड़ेगी कमजोर
शोध में एक और चिंताजनक बात सामने आई। मंगल जैसी परिस्थितियों से प्रभावित कुछ बैक्टीरिया को खत्म करने में मानव प्रतिरक्षा कोशिकाओं को अधिक परेशानी हुई। बैक्टीरिया ज्यादा घातक नहीं बने, लेकिन अंतरिक्ष में कमजोर होती प्रतिरोधक क्षमता के कारण सामान्य संक्रमण भी गंभीर रूप ले सकता है।
मंगल और चंद्रमा जैसी सतहों की महीन धूल भी बड़ा खतरा है। प्रयोगशाला परीक्षणों में पाया गया कि इस तरह के बारीक धूल कण फेफड़ों की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं और गंभीर सूजन पैदा कर सकते हैं। लंबे समय तक सतह पर काम करने वाले अंतरिक्ष यात्रियों के लिए यह जोखिम और बढ़ सकता है।
दोहरा खतरा-मंगल को पृथ्वी से, पृथ्वी को मंगल से बचाना
वैज्ञानिक इसे ‘प्लैनेटरी प्रोटेक्शन’ की चुनौती बताते हैं। पहला खतरा है पृथ्वी के जीवों से दूसरे ग्रह को दूषित करना, जिसे ‘फॉरवर्ड कंटैमिनेशन’ कहा जाता है। दूसरा खतरा है मंगल या किसी अन्य खगोलीय पिंड से संभावित हानिकारक पदार्थ पृथ्वी पर वापस लाना, जिसे ‘बैकवर्ड कंटैमिनेशन’ कहते हैं।
इसलिए मंगल मिशन की सफलता केवल इंसान को वहां उतारने में नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने में भी होगी कि पृथ्वी के ‘बिन बुलाए मेहमान’ किसी दूसरी दुनिया की असली कहानी को हमेशा के लिए न बदल दें।

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