सामना संवाददाता / मुंबई
चुनाव में अनुशासन और संगठन का दावा करने वाली भाजपा अब अपने ही बनाए नियमों में उलझती नजर आ रही है। टिकट बंटवारे की अफरा-तफरी के बीच पार्टी में ऐसा घमासान मचा है कि कई जगह असली और नकली एबी फॉर्म घूम रहे हैं। नतीजतन एक ही सीट पर दो-दो दावेदार सामने आ रहे हैं। इसके चलते भाजपा संगठन में जबरदस्त तनाव पैदा हो गया है।
सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार के अलावा बागी और चहेते नेता ने भी नकली या संदिग्ध एबी फॉर्म के सहारे नामांकन भर दिए हैं। प्रतीक्षा नगर में भाजपा कार्यकर्ता दत्ता कालसकर द्वारा डुप्लिकेट एबी फॉर्म भरे जाने का मामला सामने आया है। इसके बाद भाजपा की चिंताएं बढ़ गई हैं क्योंकि भाजपा कार्यालय में किस तरीके से और कितने नकली एबी फार्म जारी किए गए हैं। यह किसी को पता नहीं है। सवाल यह है कि प्रत्याशियों तक यह नकली फॉर्म वैâसे पहुंचे और किसने पहुंचाया?
चुनाव आयोग कन्फ्यूज असली कौन, नकली कौन?
भाजपा में बागी नेताओं द्वारा डुप्लिकेट एबी फॉर्म भरने का मामला सामने आया है। ऐसे में चुनाव आयोग को यह फर्क समझना मुश्किल हो गया है कि असली प्रत्याशी कौन और नकली प्रत्याशी कौन है? इससे न केवल चुनावी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं, बल्कि भाजपा की अंदरूनी हालत भी उजागर हो गई है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि टिकट न मिलने से नाराज नेताओं ने जानबूझकर एबी फॉर्म का दुरुपयोग किया है, ताकि अधिकृत उम्मीदवार को नुकसान पहुंचाया जा सके। यही वजह है कि भाजपा में बगावत अब सिर्फ भाषणों तक सीमित नहीं रही, बल्कि सीधे चुनावी दस्तावेजों तक पहुंच गई है। इस पूरे घटनाक्रम ने भाजपा नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। पार्टी के भीतर फोन कॉल, बैठकें और डैमेज कंट्रोल की कवायद तेज हो गई है, लेकिन जमीनी स्तर पर गुस्सा और भ्रम कम होने का नाम नहीं ले रहा। विपक्ष ने इस मुद्दे को हाथोंहाथ लेते हुए भाजपा पर जनतंत्र के साथ खिलवाड़ और चुनावी फर्जीवाड़े का आरोप लगाया है।
