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वाह रे मैडम महापौर…!.. खुले हैं मैनहोल, नालों की सफाई में भ्रष्टाचार… कौन करेगा जनता की सुरक्षा?

-गटर में गिर रहे हैं कर्मचारी

-जनता की सुरक्षा पर उठे सवाल

रामदिनेश यादव / मुंबई

मुंबई में मानसून की पहली बारिश ने एक बार फिर मनपा की तैयारियों की पोल खोल दी है। शहर के कई इलाकों में जलभराव, खुले मैनहोल और सड़कों पर बहते नालों के कारण मुंबईकरों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लेकिन इन खतरनाक परिस्थितियों की जांच करने के बजाय अब महापौर रितू तावडे उस कर्मचारी की जांच कराने में जुट गई हैं, जो उनके दौरे के दौरान खुले ड्रेन में गिर गया था।
गांधी मार्केट इलाके में जलजमाव का जायजा लेने पहुंची महापौर के सामने ही मनपा के एक अधिकारी खुले ड्रेन में गिर गए थे। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मनपा की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे। हालांकि, इस पूरे मामले में महापौर रितु तावडे ने घटना को ‘संदिग्ध’ बताते हुए जांच के आदेश दिए हैं। महापौर का कहना है कि जिस स्थान पर ड्रेन खुला था, वहां पहले से बैरिकेडिंग की गई थी और संबंधित कर्मचारी ने बैरिकेड हटाकर उस रास्ते से प्रवेश किया। इसी आधार पर उन्होंने इस घटना के पीछे किसी अन्य कारण की आशंका जताई है, लेकिन मुंबई में कई इलाकों में जलभराव, खुले मैनहोल, जाम नाले और सड़कों पर बहते नालों की समस्या को लेकर कोई जांच अथवा नाला सफाई में व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर कोई जांच करने के बजाय, नाले में गिरने वाले अधिकारी की जांच का आदेश दिया जा रहा है।
कब होगी भ्रष्टाचार की जांच?
इस मामले को लेकर विपक्ष और जनता का सवाल है कि जांच उस कर्मचारी की क्यों हो रही है, जो गटर में गिरा, जबकि असली मुद्दा खुले पड़े मैनहोल, ड्रेनेज व्यवस्था और नाला सफाई में भ्रष्टाचार है। इसकी जांच कब होगी? भारी बारिश के दौरान खुले मैनहोल और गटर नागरिकों के लिए मौत का जाल साबित हो सकते हैं। हर वर्ष मुंबई में ऐसे हादसों में लोगों की जान जाने की घटनाएं सामने आती रही हैं। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि मुंबई में नागरिक सुरक्षा और नाले सफाई के दावों पर जवाब देने के बजाय अब पूरा ध्यान उस कर्मचारी की भूमिका की जांच पर केंद्रित किया जा रहा है। जबकि यह मुद्दा केवल एक कर्मचारी के गिरने का नहीं, बल्कि मनपा की प्राथमिकताओं और शहर की सुरक्षा व्यवस्था का बन गया है।

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