मुख्यपृष्ठनए समाचारभारत पर ‘वॉटर बम' डालेगा चीन!

भारत पर ‘वॉटर बम’ डालेगा चीन!

-ब्रह्मपुत्र नदी पर शुरू किया सबसे बड़े बांध का निर्माण कार्य

-मेगा डैम को लेकर भारत की आपत्ति को ठुकराया

-सीमावर्ती भूमि और संसाधनों को कर सकता है बर्बाद

सामना संवाददाता / नई दिल्ली

चीन ने अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सीमा के करीब तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी पर १६७.८ बिलियन अमेरिकी डॉलर की लागत से बांध का निर्माण औपचारिक रूप से शुरू कर दिया है। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग ने न्यिंगची शहर में ब्रह्मपुत्र नदी के निचले क्षेत्र में आयोजित भूमिपूजन समारोह में बांध के निर्माण की शुरुआत का एलान किया, जिसे स्थानीय रूप से यारलुंग जांगबो के नाम से जाना जाता ह ।
विश्व के सबसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट माने जानेवाले इस हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट ने निचले तटवर्ती देशों, भारत और बांग्लादेश के लिए चिंता पैदा कर दी है। यह बांध हिमालय पर्वतमाला में एक विशाल घाटी पर बनाया जाएगा, जहां ब्रह्मपुत्र नदी एक विशाल यू-टर्न लेकर अरुणाचल प्रदेश और फिर बांग्लादेश में दाखिल होती है। पहले की रिपोर्टों के अनुसार, इस प्रोजेक्ट का साइज दुनिया के किसी भी अन्य इंप्रâास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट से कहीं ज्यादा बड़ा होगा, जिसमें चीन का अपना थ्री गॉर्जेस बांध भी शामिल है, जिसे दुनिया में सबसे बड़ा माना जाता है।
क्या हैं भारत की चिंताएं?
चीन ने २०१५ में तिब्बत में सबसे बड़े १.५ बिलियन अमेरिकी डॉलर के हाइड्रो पावर स्टेशन को पहले ही चालू कर दिया है, जिससे भारत में चिंताएं पैदा हो गई हैं। भारत में इस बात को लेकर चिंता है कि बांध के साइज और स्केल की वजह से चीन को जल प्रवाह को नियंत्रित करने का अधिकार मिलने के अलावा, इससे बीजिंग को भारी मात्रा में पानी छोड़ने में भी मदद मिलेगी, जिससे युद्ध के समय सीमावर्ती क्षेत्रों में बाढ़ आ सकती है। भारत भी अरुणाचल प्रदेश में ब्रह्मपुत्र पर एक बांध बना रहा है। भारत और चीन ने सीमा पार नदियों से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करने के लिए २००६ में विशेषज्ञ स्तरीय तंत्र (ईएलएम) की स्थापना की, जिसके तहत चीन बाढ़ के मौसम के दौरान भारत को ब्रह्मपुत्र नदी और सतलुज नदी पर जल विज्ञान संबंधी जानकारी प्रदान करता है।
संवेदनशील क्षेत्र में बन रहा बांध
बीते साल १८ दिसंबर को भारत और चीन के सीमा संबंधी विशेष प्रतिनिधियों (एसआर) एनएसए अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच हुई वार्ता में सीमा पार नदियों के आंकड़ों को साझा करने का मुद्दा उठा था। ब्रह्मपुत्र बांध से इंजीनियरिंग से जुड़ी भारी चुनौतियां पैदा होती हैं, क्योंकि प्रोजेक्ट साइट टेक्टोनिक प्लेट सीमा पर स्थित है, जहां काफी भूकंप आते हैं। तिब्बती पठार, जिसे विश्व की छत माना जाता है, टेक्टोनिक प्लेटों के ऊपर स्थित होने के कारण अक्सर भूकंप का अनुभव करता है, लेकिन पिछले साल दिसंबर में एक आधिकारिक बयान में भूकंप संबंधी चिंताओं को दूर करने की कोशिश करते हुए कहा गया कि हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट सुरक्षित है तथा इसमें इकोलॉजिकल प्रोटेक्शन का ध्यान रखा गया है।

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