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संभल हिंसा को आयोग ने बताया पूर्व नियोजित साजिश!.. विधानसभा में पेश हुई रिपोर्ट

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के संभल में २४ नवंबर २०२४ को जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हुई हिंसा को न्यायिक जांच आयोग ने पूर्व नियोजित साजिश बताया है। आयोग की रिपोर्ट बुधवार, ५ अगस्त २०२६ को उत्तर प्रदेश विधानसभा में पेश की गई। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सर्वे को लेकर गलत सूचनाएं पैâलाकर लोगों को भड़काया गया और योजनाबद्ध तरीके से बड़ी भीड़ मस्जिद के बाहर जुटाई गई।
इलाहाबाद हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश देवेंद्र कुमार अरोड़ा की अध्यक्षता वाले तीन सदस्यीय आयोग ने समाजवादी पार्टी के सांसद जिया-उर-रहमान बर्क, सपा विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहेल इकबाल और कुछ अन्य लोगों की भूमिका का उल्लेख किया है। हालांकि, रिपोर्ट में किसी का नाम आना अपने आप में अपराध सिद्ध होना नहीं है और अंतिम जिम्मेदारी न्यायिक प्रक्रिया से ही तय होगी।
आयोग के अनुसार, हिंसा में चार लोगों की मौत हुई थी और २८ पुलिसकर्मी घायल हुए थे। इनमें सात पुलिसकर्मियों को गोली लगने की बात कही गई है। रिपोर्ट का दावा है कि मृतकों को लगी गोलियां पुलिस के हथियारों से नहीं चली थीं। उपद्रवियों पर पुलिस के हथियार और सरकारी सामान लूटने की कोशिश का भी आरोप लगाया गया है।
रिपोर्ट ने पुलिस और जिला प्रशासन की कार्रवाई को संयमित तथा प्रभावी बताया है। वहीं विपक्ष पहले से हिंसा और पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार पर सवाल उठाता रहा है। आयोग की रिपोर्ट सामने आने के बाद संभल हिंसा एक बार फिर राजनीतिक विवाद के केंद्र में आ गई है। अब सवाल है कि सरकार रिपोर्ट के आधार पर क्या कार्रवाई करती है और आरोपों की अदालत में कितनी पुष्टि हो पाती है।

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