रवीन्द्र मिश्रा / मुंबई
नालासोपारा पश्चिम स्थित यशवंत गौरव रोड की सेजलज्योत इमारत में दो दिवसीय भगवान नर्मदेश्वर महादेव की प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया।
श्रावण मास भगवान शिव की आराधना का पवित्र महीना माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह महीना समुद्र मंथन तथा प्रकृति से जुड़ाव का प्रतीक है। मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए इसी माह कठोर तपस्या की थी। इसी दौरान देवताओं और दानवों द्वारा किए गए समुद्र मंथन से निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने अपने कंठ में धारण कर संसार का कल्याण किया था। शिवभक्तों का विश्वास है कि श्रावण मास में किए गए जप, तप, पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है।
इसी धार्मिक महत्व को ध्यान में रखते हुए सेजलज्योत इमारत स्थित शिव मंदिर में भगवान नर्मदेश्वर महादेव की प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न कराई गई। मंदिर से जुड़े शिवभक्त प्रमोद मिश्रा ने बताया कि पंडित देवेंद्र शुक्ला एवं उनके सहयोगी विद्वान आचार्यों ने वैदिक विधि-विधान से भगवान की प्राण-प्रतिष्ठा कराई।
इस अवसर पर भगवान की भव्य पालकी यात्रा निकाली गई। साथ ही संगीतमय सुंदरकांड पाठ एवं भजन-कीर्तन का आयोजन भी हुआ। 4 अगस्त, मंगलवार को मंदिर परिसर में महाभंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में शिवभक्तों ने महाप्रसाद ग्रहण किया।
