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छंटाई के बहाने ठेकेदार कर रहे हैं लकड़ियों की लूट?…मनपा को लग रहा है चूना… आरटीआई में खुलासा

सामना संवाददाता / मुंबई

मुंबई मनपा पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पेड़ भले ही महानगरपालिका की संपत्ति हों, लेकिन उनसे निकली लकड़ी की कमाई सीधे ठेकेदार की जेब में जा रही है और मनपा आंखें मूंदे बैठी है। हर साल मानसून से पहले और बाद में मनपा १.११ लाख से अधिक पेड़ों की छंटाई करवाती है। इसके लिए ठेकेदारों को भुगतान किया जाता है यानी काम का मेहनताना पहले ही मिल चुका होता है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि छंटाई के बाद निकली लकड़ी की बिक्री का अधिकार भी उन्हीं ठेकेदारों को दे दिया जाता है।
रिपोर्ट की मानें तो यह सब तब हो रहा है, जब नियम साफ कहते हैं कि पेड़ और उनके हिस्से (जैसे तना और शाखाएं) मनपा की संपत्ति होते हैं और उनका इस्तेमाल मनपा की परियोजनाओं के लिए ही होना चाहिए। वैसे आरटीआई के जरिए सामने आए तथ्यों के मुताबिक, ठेकेदार न केवल लकड़ी उठा रहे हैं, बल्कि उसे खुले बाजार में बेचकर मोटा मुनाफा भी कमा रहे हैं और मनपा पूरी तरह चुप है।
करोड़ों रुपए निजी जेब में
खुले बाजार में लकड़ी की कीमत करीब ५०० रुपए प्रति क्विंटल है। १ लाख से अधिक पेड़ों से निकली लकड़ी के हिसाब से अनुमान लगाया जाए तो करोड़ों रुपए का राजस्व मनपा के खजाने में आना चाहिए था, लेकिन वह पैसा निजी जेबों में जा रहा है।
ठेकेदारों से की जाए वसूली
रिपोर्ट की मानें तो वॉचडॉग फाउंडेशन ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए मांग की है कि मनपा इस वर्ष की मानसून-पूर्व छंटाई से निकली लकड़ी के संग्रह, बिक्री और उपयोग का तत्काल ऑडिट कराए। अगर किसी भी तरह की राजस्व हानि या गड़बड़ी सामने आती है तो दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों से पूरी राशि वसूली जाए।

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