मुख्यपृष्ठस्तंभकोर्ट-रूम: हत्या, फिरौती के उद्देश्य से अपहरण गुनाह है

कोर्ट-रूम: हत्या, फिरौती के उद्देश्य से अपहरण गुनाह है

एड. कनई बिस्वास

-भीख मंगवाने के उद्देश्य से बच्चे का अपहरण या अंग-भंग

-तथा विदेश से लड़के या लड़की को भारत लाना (अपहरण) है अपराध

-धारा १३९, १४० और १४१

-भाग:४७
भारतीय न्याय संहिता, २०२३ बच्चों और अन्य व्यक्तियों की स्वतंत्रता, सुरक्षा तथा मानव गरिमा की रक्षा के लिए अपहरण से संबंधित अपराधों को अत्यंत गंभीर मानती है। यदि किसी बच्चे का भीख मंगवाने के लिए अपहरण किया जाता है, किसी व्यक्ति का हत्या या फिरौती के उद्देश्य से अपहरण किया जाता है अथवा किसी लड़के या लड़की को अवैध उद्देश्य से विदेश से भारत लाया जाता है तो ऐसे अपराधों के लिए कठोर दंड का प्रावधान है। धारा १३९, १४० और १४१ इन्हीं अपराधों को स्पष्ट करती हैं।
केस स्टडी- १: ‘भीख मंगवाने के उद्देश्य से बच्चे का अपहरण या अंग-भंग करना’ (धारा १३९)
एक गिरोह ने आठ वर्षीय बच्चे का अपहरण कर उसे भीख मंगवाने के लिए मजबूर किया। जांच में यह भी सामने आया कि बच्चे को अधिक दया प्राप्त करने के उद्देश्य से शारीरिक रूप से क्षति पहुंचाई गई थी।
अदालत क्या देखेगी?
क्या पीड़ित बच्चा था?
क्या उसका अपहरण या अंग-भंग भीख मंगवाने के उद्देश्य से किया गया?
क्या अभियोजन पक्ष पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत कर सका?
फैसला- यदि यह सिद्ध हो जाता है कि बच्चे का अपहरण या अंग-भंग भीख मंगवाने के उद्देश्य से किया गया था तो आरोपी धारा १३९ के अंतर्गत कठोर दंड का पात्र होगा। समझें: धारा १३९ बच्चों के शोषण के विरुद्ध एक कठोर प्रावधान है। किसी बच्चे का भीख मंगवाने के लिए अपहरण करना या उसे शारीरिक रूप से क्षति पहुंचाना अत्यंत गंभीर अपराध माना गया है।
केस स्टडी- २: ‘हत्या या फिरौती के उद्देश्य से अपहरण’ (धारा १४०)
एक उद्योगपति के पुत्र का अपहरण कर उसके परिवार से भारी रकम की फिरौती मांगी गई। आरोपियों ने फिरौती न मिलने पर हत्या की धमकी भी दी।
अदालत क्या देखेगी?
क्या अपहरण का उद्देश्य फिरौती वसूलना या हत्या करना था?
क्या आरोपी ने पीड़ित या उसके परिवार को धमकी दी?
क्या घटना के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध हैं?
फैसला- यदि अपराध सिद्ध हो जाता है तो आरोपी धारा १४० के अंतर्गत कठोर दंड का पात्र होगा। समझें: धारा १४० के अनुसार हत्या, फिरौती या अन्य गंभीर अपराध के उद्देश्य से किसी व्यक्ति का अपहरण या व्यपहरण अत्यंत गंभीर अपराध है, जिसके लिए कठोर दंड का प्रावधान किया गया है।
केस स्टडी – ३: ‘विदेश से लड़के या लड़की को भारत लाना’ (धारा १४१)
एक व्यक्ति ने रोजगार का झूठा लालच देकर १७ वर्षीय लड़की को विदेश से भारत बुलाया। जांच में पता चला कि उसका उद्देश्य उसका अवैध शोषण करना था।
अदालत क्या देखेगी?
क्या पीड़ित लड़का या लड़की विदेश से भारत लाई गई थी?
क्या उसे अवैध या अनैतिक उद्देश्य से भारत लाया गया?
क्या आरोपी की मंशा साक्ष्यों से सिद्ध होती है?
फैसला- यदि यह सिद्ध हो जाता है कि पीड़ित को अवैध उद्देश्य से विदेश से भारत लाया गया, तो आरोपी धारा १४१ के अंतर्गत दंडित होगा। समझें: धारा १४१ का उद्देश्य बच्चों और युवाओं को सीमा पार मानव शोषण से संरक्षण प्रदान करना है। किसी लड़के या लड़की को अवैध उद्देश्य से विदेश से भारत लाना गंभीर अपराध है।
भारतीय न्याय संहिता यह स्पष्ट करती है कि बच्चों और अन्य व्यक्तियों का अपहरण, उनका शोषण तथा फिरौती या अन्य अवैध उद्देश्यों के लिए उनकी स्वतंत्रता का हनन समाज के विरुद्ध गंभीर अपराध है। ऐसे मामलों में कानून पीड़ितों को विशेष संरक्षण प्रदान करता है और दोषियों के लिए कठोर दंड का प्रावधान करता है।
(अगले अंक में: धारा १४२, १४३ और १४४ – ‘अपहृत या व्यपहृत व्यक्ति को छिपाना या बंधक बनाकर रखना, मानव तस्करी तथा तस्करी के शिकार व्यक्ति का शोषण’ को आसान उदाहरणों के साथ समझेंगे।)

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