सामना संवाददाता / मुंबई
मेट्रो लाइन-१२ पर फिर खुला खजाना
४,८८२ करोड़ का सिस्टम टेंडर जारी
बढ़ती लागत और सुस्त रफ्तार पर उठे बड़े सवाल
-पांच साल रखरखाव का बोझ भी जनता पर?
टेंडर शर्तों के अनुसार, चयनित ठेकेदार को उपकरणों की स्थापना के बाद दो वर्ष की डिफेक्ट लाइबेलिटी अवधि पूरी होने पर पांच वर्षों तक व्यापक रखरखाव भी करना होगा। जानकारों का कहना है कि ऐसे दीर्घकालिक अनुबंधों का वित्तीय भार अंतत: सरकारी खजाने और अप्रत्यक्ष रूप से करदाताओं पर पड़ता है।
मुंबई महानगर क्षेत्र में मेट्रो नेटवर्क के विस्तार के बड़े-बड़े दावों के बीच मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) ने मेट्रो लाइन-१२ के लिए ४,८८२ करोड़ रुपए का विशाल सिस्टम कॉन्ट्रैक्ट जारी कर दिया है। हालांकि, इस टेंडर ने एक बार फिर परियोजना की धीमी रफ्तार और बढ़ती लागत को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। आम यात्रियों को राहत देने का दावा करने वाली यह परियोजना अभी तक निर्माण और तकनीकी प्रक्रियाओं के जाल में उलझी हुई नजर आ रही है।
सूत्रों के अनुसार, इस पैकेज में ट्रेनों की खरीद, सीबीटीसी सिग्नलिंग, दूरसंचार नेटवर्क, बिजली आपूर्ति, डिपो उपकरण, लिफ्ट, एस्केलेटर और अन्य तकनीकी प्रणालियों की आपूर्ति व स्थापना शामिल है। अकेले सिस्टम पैकेज पर लगभग ४,८८२ करोड़ रुपए खर्च किए जाने हैं, जबकि परियोजना की कुल लागत पहले ही कई हजार करोड़ रुपए के स्तर पर पहुंच चुकी है।
बढ़ती लागत, बढ़ता इंतजार
शहर में कई मेट्रो परियोजनाएं समयसीमा से पीछे चल रही हैं। ऐसे में मेट्रो लाइन-१२ के लिए जारी यह नया मेगा टेंडर इस बात का संकेत माना जा रहा है कि परियोजना को पूरी तरह चालू होने में अभी लंबा समय लग सकता है। यात्रियों को तत्काल राहत मिलने के बजाय उन्हें वर्षों तक और इंतजार करना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निर्माण कार्य और सिस्टम इंस्टॉलेशन समान गति से आगे नहीं बढ़े, तो भारी-भरकम निवेश के बावजूद परियोजना का लाभ समय पर लोगों तक नहीं पहुंच पाएगा।
कागजों पर विस्तार, सड़कों पर जाम बरकरार
एमएमआरडीए का दावा है कि मेट्रो लाइन-१२ से सड़क यातायात का दबाव कम होगा और यात्रियों को तेज यात्रा का विकल्प मिलेगा। लेकिन हकीकत यह है कि मुंबई महानगर क्षेत्र के कई इलाकों में आज भी अधूरी परियोजनाओं, निर्माण कार्यों और ट्रैफिक जाम से लोग परेशान हैं। ऐसे में नागरिकों के मन में सवाल है कि नई घोषणाओं और टेंडरों से पहले पुरानी परियोजनाओं को समय पर पूरा क्यों नहीं किया जा रहा?
