-बेघर कुत्ते को 24 घंटे जंजीरों में जकड़ा, पुलिस ने दिखाई सख्ती, लेकिन मनपा का नो एक्शन
द्रुप्ति झा / मुंबई
मायानगरी में इंसानी संवेदनहीनता का एक और शर्मनाक मामला सामने आया है। चूनाभट्टी इलाके में एक बेजुबान कुत्ते को घर के बाहर कथित तौर पर 24 घंटे भारी लोहे की जंजीरों से बांधकर रखा जा रहा था। चिलचिलाती धूप हो या बारिश और ठंड, कुत्ता इसी तरह जंजीरों में बंधा रहने को मजबूर था।
कुत्ते की हालत की जानकारी मिलने के बाद पाल वेलफेयर फाउंडेशन और चूनाभट्टी पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। इस मामले में पुलिस ने पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 11(1)(g) और 11(1)(h) के तहत एन.सी. शिकायत दर्ज कर ली है। पुलिस की कार्रवाई के बाद अब सवाल मनपा प्रशासन पर उठ रहे हैं। शहर में पशुओं से जुड़े मामलों की निगरानी और उनके संरक्षण को लेकर मनपा का संबंधित विभाग आखिर कितना सक्रिय है? क्या प्रशासन की नजर में पशुओं पर होने वाला अत्याचार तभी आता है, जब कोई एनजीओ या नागरिक शिकायत लेकर पुलिस के पास पहुंचे?
मुंबई में पशु कल्याण को लेकर तमाम दावे किए जाते हैं, लेकिन चूनाभट्टी की यह घटना उन दावों की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े करती है। अगर किसी बेजुबान को घंटों तक जंजीर से बांधकर रखने की शिकायत के बाद पुलिस और एनजीओ को हस्तक्षेप करना पड़े, तो मनपा के संबंधित विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक सुधीर कुडलकर और पाल एडवाइजर संदीप कुडतरकर के मार्गदर्शन में कार्यकर्ता सार्थक चौगुले और जानकी सोनी ने मौके पर पहुंचकर कुत्ते की स्थिति का निरीक्षण किया। मालिक को कुत्ते के लिए पर्याप्त भोजन, स्वच्छ पानी और सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराने की सख्त हिदायत दी गई है। पाल वेलफेयर फाउंडेशन ने भी स्पष्ट किया है कि वह मामले पर लगातार नजर रखेगा।
पाल ग्रुप की एडमिन दीपाली का कहना है कि स्लम क्षेत्र में रहने वाले एक व्यक्ति ने बिना लाइसेंस के कुत्ते को पालतू बनाया है। लोगों ने कई बार इसकी शिकायत मनपा से की, इसके बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
