-सरकार ने लिया तत्काल संज्ञान…गणेश भक्तों के विरोध के आगे एसटी महामंडल को फैसला वापस लेना पड़ा
सामना संवाददाता / मुंबई
गणेशोत्सव के लिए कोकण जाने वाले गणेश भक्तों की जेब पर पड़ने वाले 30 प्रतिशत अतिरिक्त एसटी शुल्क के खिलाफ उठी आवाज आखिरकार सरकार तक पहुंची और सरकार ने मामले का गंभीर संज्ञान लेते हुए यह अतिरिक्त शुल्क रद्द करने का निर्णय लिया है। ‘दोपहर का सामना’ ने गणेश भक्तों पर पड़ने वाले अतिरिक्त आर्थिक बोझ का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद सरकार ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए यह महत्वपूर्ण फैसला लिया।
गणेश भक्त कोकणवासी प्रवासी संघ ने एसटी महामंडल के इस फैसले का जोरदार विरोध किया था। संघ के कार्याध्यक्ष दीपक चव्हाण ने सवाल उठाया था कि ‘यात्री हमारे देवता हैं’ कहने वाली एसटी गणेशोत्सव के दौरान उन्हीं यात्रियों की जेब पर 30 प्रतिशत अतिरिक्त बोझ क्यों डाल रही है?
संघ ने इस फैसले के विरोध में समूह आरक्षण भी रोक दिया था। साथ ही सरकार के समक्ष अतिरिक्त शुल्क वापस लेने की मांग रखी थी।
गणेश भक्तों की मांग पर सरकार का फैसला
परिवहन मंत्री तथा एसटी महामंडल के अध्यक्ष प्रताप सरनाईक ने जानकारी देते हुए कहा कि सरकार के निर्देशानुसार इस वर्ष गणेशोत्सव के लिए कोकण जाने वाले यात्रियों के एकतरफा समूह आरक्षण पर लगाया गया 30 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क रद्द किया जा रहा है। इस संबंध में एसटी प्रशासन द्वारा जल्द ही आधिकारिक परिपत्र जारी किया जाएगा।
कोकणवासियों और एसटी का भावनात्मक रिश्ता
गणेशोत्सव, मुंबई-ठाणे और कोकणवासियों के लिए केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आस्था और परंपरा का विषय है। मुंबई और ठाणे से कोकण के गांवों तक सीधे पहुंचने के लिए लाखों कोकणवासी हर वर्ष एसटी को प्राथमिकता देते हैं। गणेशोत्सव के दौरान हर वर्ष लगभग 5,000 बसें आरक्षित की जाती हैं। इस वर्ष भी बड़े पैमाने पर बसों की व्यवस्था की गई थी।
घाटे का हवाला देकर लगाया था अधिभार
एसटी महामंडल के अनुसार, एकतरफा समूह आरक्षण के बाद बसों को कोकण से खाली वापस लाना पड़ता है। इसके कारण ईंधन खर्च के साथ चालक और परिचालकों के अतिरिक्त समय भत्ते का भार महामंडल पर पड़ता है। डीजल की बढ़ती कीमतों तथा कर्मचारियों के अतिरिक्त समय भत्ते में वृद्धि के कारण एसटी का घाटा बढ़ रहा है। इसी आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए इस वर्ष एकतरफा समूह आरक्षण पर 30 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने का निर्णय लिया गया था। लेकिन गणेशभक्तों और कोकणवासियों की तीव्र नाराजगी के बाद सरकार ने इस फैसले पर पुनर्विचार किया।
जनभावना के आगे झुका फैसला!
अतिरिक्त शुल्क वापस लेने की मांग को लेकर कोकणवासियों और गणेशभक्त मंडलों ने सरकार के समक्ष निवेदन किया था। सरकार ने जनभावना को गंभीरता से लेते हुए अतिरिक्त शुल्क रद्द करने का निर्णय लिया। अब एसटी महामंडल को होने वाले संभावित आर्थिक नुकसान की भरपाई अन्य मार्गों पर यात्री संख्या और यातायात बढ़ाकर करने के निर्देश दिए गए हैं।
‘दोपहर का सामना’ ने उठाई आवाज, सरकार ने लिया संज्ञान!
गणेशभक्तों की जेब पर पड़ने वाले अतिरिक्त आर्थिक बोझ का मुद्दा ‘दोपहर का सामना’ ने प्रमुखता से उठाया। खबर प्रकाशित होने के बाद इस विषय पर चर्चा तेज हुई और सरकार ने मामले का गंभीर संज्ञान लेते हुए 30 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क रद्द करने का निर्णय लिया। यानी गणेशभक्तों की आवाज बुलंद हुई और सरकार को अपना फैसला बदलना पड़ा।
अब सवाल यह है कि 30 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क तो रद्द हो गया, लेकिन 17 जुलाई से लागू 13.50 प्रतिशत स्थायी किराया वृद्धि पर सरकार कब पुनर्विचार करेगी? गणेशोत्सव के लिए घर लौटने वाले लाखों यात्रियों की नजर अब इसी अगले फैसले पर टिकी है। गणेश भक्तों की आस्था पर लगा 30 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क हट गया; अब किराया वृद्धि की अगली परीक्षा सरकार की है!
