रवीन्द्र मिश्रा / मुंबई
भाई बहन के पवित्र प्रेम, अटूट विश्वास, एवं कर्तव्य का प्रतीक माना जाने वाला त्यौहार रक्षा बंधन। जहां बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांध कर उनके समृद्ध सफल जीवन की कामना के लिए प्रार्थना करतीं हैं। इस वर्ष के इस त्योहार पर भाइयों की कलाई पर बांधी जाने वाली राखी की बाजार में हल्दी रंग से बनी राखियों की मांग बढ़ी है। राखी निर्माता संजय जैन (अशोक आर्ट) बताते हैं कि वैसे तो बाजार में हजारों किस्म की राखियां उपलब्ध हैं लेकिन इस वर्ष हल्दी कुंकुम वाले रंग वाली राखियां ग्राहकों को ज्यादा पसंद आ रही हैं। मध्यम रेंज की यह राखी छोटे बड़े सभी को पसंद आ रही है। रेशमी काटन धागे से बनीं गोल्डन हल्का पीला कलाइयों पर अच्छा सूट करता है। आज कल विदेश में रहने वाले भाई बहनों में भी इस वर्ष राखी का ज्यादा क्रेज देखा जा रहा है। वे अमेरिकन डायमंड से बनी कार्ड पैड वाली राखी ज्यादा खरीद रही हैं। छोटे बच्चों को जहां लाइटिंग वाली, फुटबॉल, क्रिकेट, कार्टून कैरेक्टर, लाइट वेल्ट तथा म्युजिक वाली राखी पसंद है तो वहीं माडर्न लड़कियां पेंडल वाली राखी ज्यादा पसंद कर रही है। मध्यम परिवार वालों को भैया भाभी पूजा थाली,कनकावटी तथा लुंबा राखी पसंद आ रही है। वैष्णव संप्रदाय के लोग श्रावण महिने में प्रभू जी के झूला डेकोरेशन के लिए हिंडोला राखी ज्यादा पसंद कर रहे हैं। रुद्राक्ष वाली राखी और यू वी प्रिंट तो एवरग्रीन है। संजय जैन कहते हैं कि राखी का निर्माण कुटीर उद्योग है। यहां जरूरमंद महिलाएं अपने कामकाज से निवृत्त होकर धागे से बनने वाली राखी बनाने के काम में जुट जाती हैं। इसमें मजदूरी बहुत कम है ।। इसलिए महिलाएं अपने गृह कार्य से खाली होकर यह कार्य करती हैं। जिससे उनका पेट परदा चलता है।इस वर्ष कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, मध्यप्रदेश तथा गुजरात के ग्राहक देर से पहुंचे। इसलिए उन्हें जिस पैटर्न का माल चाहिए था वह उपलब्ध नहीं हो पाया। दूसरी बात यह कि खाड़ी देश में चल रहे युद्ध, सोने चांदी के बढ़े दाम तथा प्लेटिंग मंहगी होने के कारण उन्हें 10 प्रतिशत मंहगे भाव से खरीदना पड़ रहा है।
