सामना संवाददाता / मुंबई
भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त डॉ. एस. वाई. कुरैशी की पुस्तक ‘INDIA and I: A Hundred Memories, Not a Memoir’ का लोकार्पण नेहरू सेंटर, मुंबई में गरिमापूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।
इस अवसर पर प्रसिद्ध कवि, गीतकार एवं लेखक जावेद अख्तर, अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त अभिनेता एवं लेखक कबीर बेदी, सुप्रसिद्ध अभिनेत्री एवं फिल्मकार नंदिता दास, वरिष्ठ पत्रकार एवं वित्तीय मामलों की विशेषज्ञ सुचेता दलाल तथा अभिनेता, लेखक, रंगकर्मी एवं संग्रहालय-क्यूरेटर अतुल तिवारी सहित साहित्य, सिनेमा, पत्रकारिता, राजनीति, प्रशासन, सामाजिक और रचनात्मक क्षेत्रों की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियां उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम में डॉ. एस. वाई. कुरैशी ने पुस्तक की रचना-यात्रा और उसमें संकलित स्मृतियों के बारे में अपने विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि यह पुस्तक पारंपरिक आत्मकथा नहीं, बल्कि उनके व्यक्तिगत जीवन, सार्वजनिक सेवा और देश की लोकतांत्रिक यात्रा से जुड़ी सौ चुनिंदा स्मृतियों का संकलन है। इन संस्मरणों में भारतीय समाज, प्रशासन, संस्कृति और सार्वजनिक जीवन के अनेक महत्वपूर्ण अनुभवों की झलक मिलती है।
जावेद अख्तर ने अपने संबोधन में स्मृतियों को सहेजने और उन्हें अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के महत्व पर विचार रखे। उन्होंने पुस्तक की मानवीय संवेदना, सहज अभिव्यक्ति और डॉ. कुरैशी के व्यापक जीवन-अनुभवों का उल्लेख किया।
कबीर बेदी ने डॉ. कुरैशी की सार्वजनिक जीवन-यात्रा और पुस्तक में प्रस्तुत अनुभवों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसी पुस्तकें पाठकों को एक प्रतिष्ठित व्यक्तित्व के जीवन के साथ-साथ उस दौर के सामाजिक और राष्ट्रीय परिवर्तनों को भी समझने का अवसर देती हैं।
इस अवसर पर भारतीय लोकतंत्र, संवैधानिक मूल्यों, सार्वजनिक सेवा, सामाजिक विविधता और समकालीन समाज में संवाद की आवश्यकता पर भी सार्थक चर्चा हुई। विभिन्न क्षेत्रों से आए गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को व्यापकता और विशेष गरिमा प्रदान की। कार्यक्रम का आयोजन एवं समन्वय साउथ एशिया सॉलिडैरिटी फाउंडेशन के संस्थापक-निदेशक बृजेश त्रिपाठी द्वारा किया गया।
इस अवसर पर बृजेश त्रिपाठी ने कहा, “आज समाज के अलग-अलग वर्गों और नई पीढ़ी के बीच सार्थक संवाद की आवश्यकता पहले से अधिक है। साहित्य, संस्कृति और सार्वजनिक जीवन से जुड़े ऐसे आयोजन हमें एक-दूसरे के अनुभवों को समझने और अपने लोकतांत्रिक एवं मानवीय मूल्यों से जुड़ने का अवसर देते हैं। समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी से ही जनकल्याण और सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में ठोस कार्य किया जा सकता है।” उन्होंने डॉ. कुरैशी, सभी विशिष्ट अतिथियों और कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
