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झारखंड हाईकोर्ट ने जेपीएससी की 11वीं और 13वीं परीक्षाओं को रद्द करने के सरकारी आदेश पर लगाई रोक

अनिल मिश्र / रांची

झारखंड प्रदेश की राजधानी रांची स्थित झारखंड उच्च न्यायालय ने प्रदेश सरकार के उस फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसके तहत झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) द्वारा आयोजित दो प्रमुख परीक्षाओं को रद्द कर दिया गया था। न्यायालय के इस निर्देश से उन अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है, जो सरकार के इस निर्णय के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे। झारखंड उच्च न्यायालय ने 11वीं से 13वीं जेपीएससी परीक्षाओं और खाद्य सुरक्षा अधिकारी परीक्षा को रद्द करने के सरकारी आदेश को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया है। उच्च अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि दोनों परीक्षाओं से जुड़े प्रभावित अभ्यर्थी तत्काल प्रभाव से अपने काम पर वापस लौट सकते हैं। झारखंड सरकार के फैसले के बाद कई सफल अभ्यर्थियों ने इसका विरोध भी किया था, जिनका तर्क था कि उन्होंने अपनी मेहनत और योग्यता के बल पर परीक्षा पास की है, इसलिए उन्हें इस प्रकार दंडित नहीं किया जाना चाहिए। झारखंड उच्च न्यायालय के इस अंतरिम आदेश के बाद मामले की अगली सुनवाई और सरकार के जवाब के आधार पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी। इस बीच झारखंड हाईकोर्ट ने मामले में राज्य सरकार एवं जेपीएससी से जवाब मांगा है। प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अधिवक्ता अमृतांश वत्स और अधिवक्ता पीएएस पति ने पक्ष रखा। दरअसल यह पूरा घटनाक्रम हाल ही में हुए 26-दिन लंबे आंदोलन के बाद सामने आया है, जिसका नेतृत्व जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच (JPSC-JSSC Reforms Manch) कर रहा था। आंदोलनकारियों ने 2014 के बाद से आयोजित कई परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच और सुधार की मांग की थी।इसी आलोक में बीते 18 अगस्त की रात झारखंड सरकार द्वारा 22 नियुक्ति परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले से मचे हड़कंप के बीच झारखंड हाई कोर्ट से कुछ सफल अभ्यर्थियों के लिए राहत वाली खबर आई हैl हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की कोर्ट ने 11वीं से 13वीं जेपीएससी, फूड सेफ्टी ऑफिसर के साथ-साथ सीडीपीओ की नियुक्ति को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर सभी पक्षों की दलील सुनने के बाद रोक लगा दी है।इस मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी । वहीं इसका समय 2:15 बजे निर्धारित हुआ है।इससे पहले सरकार को काउंटर एफिडेविट फाइल करना है। हाईकोर्ट के अधिवक्ता कुमार हर्ष और अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने पूरी जानकारी दी हैl इस बीच झारखंड उच्च न्यायालय ने सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपक रोशन की एकलपीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य सरकार खुद पूरे मामले की सीआईडी से जांच करवा रही है। इसलिए बिना नेचुरल जस्टिस के किसी को भी परमानेंट नौकरी से नहीं हटाया जा सकता है।इस संबंध में याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट बताया कि इस मामले में ना तो एफआईआर हुई है ना किसी तरह की विभागीय कार्रवाई हुई है। कोर्ट ने पूछा कि इसमें किसी तरह की फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट है या नहीं। कोर्ट ने पूछा कि क्या एक आदेश जारी कर किसी की रेगुलर नियुक्ति रद्द की जा सकती है. कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए यह भी कहा कि बहुत से पुलिस पदाधिकारी और मजिस्ट्रेट के रूप में डिप्टी कलेक्टर्स देवघर स्थित श्रावणी मेला की व्यवस्था में लगे हुए थे, लेकिन उनकी सेवा खत्म होने की वजह से वहां आम लोगों को परेशानी हो रही थीl आपको बताते चलें कि देवघर स्थित बाबा धाम मेला संपन्न होने में अभी एक सप्ताह का वक्त है। ऐसे में इस बीच कोर्ट के आदेश के बाद डिप्टी कलेक्टर सहित सभी अधिकारी सुचारू रूप से सक्रिय होकर योगदान करेंगे।

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