मुख्यपृष्ठसमाचारकेएनआईटी में प्रोफेसर ने बांधी काली पट्टी, प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन

केएनआईटी में प्रोफेसर ने बांधी काली पट्टी, प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन

-संस्थान प्रशासन के तंत्र से बढ़ रही शिक्षकों की नाराजगी

सामना संवाददाता / सुल्तानपुर

यूपी के प्रतिष्ठित सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में शुमार सुल्तानपुर के कमला नेहरू प्रौद्योगिकी संस्थान (केएनआईटी) में अब सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है। आए दिन शिक्षकों का असंतोष मुखर हो रहा है। शुक्रवार को पदोन्नति के बावजूद बकाया भुगतान न किए जाने से नाराज एक और प्रोफेसर बांह पर काली पट्टी बांधकर प्रतीकात्मक विरोध पर उतर आए। संस्थान निदेशक कार्यालय के मार्ग पर उन्होंने काली पट्टी बांधकर प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया और कक्षाओं में अध्यापन कार्य के दौरान भी विरोध जताया।
करीब तीन माह पूर्व भी इसी संस्थान के एक प्रोफेसर ने आत्महत्या की चेतावनी देते हुए निदेशक कार्यालय में अनशन किया था। इससे संस्थान प्रशासन सकते में आ गया था। इसके बाद उन्हें बकाया देय का भुगतान किया जा सका था।
प्रोफेसर आरुणी सिंह का कहना है कि पदोन्नति के बाद मिलने वाला देय वेतनमान जानबूझकर संस्थान के जिम्मेदार अधिकारियों ने रोक रखा है। इससे संस्थान की वित्तीय और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। मामला अब संस्थान की चारदीवारी से निकलकर उच्चाधिकारियों तक पहुंच चुका है।
इस बाबत प्रोफेसर आरुणी सिंह की ओर से 12 अगस्त 2026 को भेजे गए ई-मेल में पदोन्नति के एरियर का भुगतान कराने की मांग की गई है। शिकायत में संस्थान के निदेशक डॉ. आरके उपाध्याय को जिम्मेदार बताते हुए उन्हें पद से हटाने का अनुरोध भी प्रो. सिंह ने कुलपति से किया है। पत्र की प्रतिलिपि संस्थान के रजिस्ट्रार, तकनीकी शिक्षा विभाग और कुलपति को भेजे जाने की बात कही गई है।
पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल पदोन्नति के बाद देय एरियर को लेकर है। यदि संबंधित कर्मचारी की पदोन्नति की औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं और संशोधित वेतनमान के अनुसार भुगतान किया जा रहा है, तो पिछली अवधि का देय एरियर किस वजह से लंबित है, इसका जवाब संस्थान को देना होगा। एरियर वेतन का ही बकाया हिस्सा होता है। ऐसे में भुगतान प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से जटिल बनाए जाने अथवा फाइल लंबित रहने की स्थिति वित्तीय पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े करती है। हालांकि, शिकायत के आधार पर किसी वित्तीय अनियमितता या हेराफेरी का निष्कर्ष जांच के बिना निकालना उचित नहीं होगा।
एरियर भुगतान को लेकर प्रोफेसर सिंह का काली पट्टी बांधकर कार्य करना विरोध का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है। खास बात यह है कि विरोध के साथ संस्थान में कार्य भी जारी रखा गया। इससे संकेत मिलता है कि मामला अब केवल पत्राचार तक सीमित नहीं है, बल्कि संबंधित शिक्षक की ओर से इसे लेकर सार्वजनिक रूप से असहमति दर्ज कराई जा रही है।
मामले में यह जांच का विषय है कि पदोन्नति किस तारीख से प्रभावी हुई, संशोधित वेतनमान कब लागू हुआ, एरियर की कुल राशि कितनी है, भुगतान में देरी का कारण क्या है और फाइल किन-किन अधिकारियों के स्तर पर लंबित रही। वित्तीय अभिलेखों की जांच से ही वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
शिकायत में निदेशक डॉ. आरके उपाध्याय की पात्रता और भूमिका को लेकर भी सवाल उठाते हुए उन्हें पद से हटाने की मांग की गई है। इन आरोपों की पुष्टि अभी नहीं हुई है। शिकायत की प्रतियां तकनीकी शिक्षा विभाग और विश्वविद्यालय स्तर तक पहुंचने के बाद अब निगाहें उच्चाधिकारियों पर हैं।
कमला नेहरू प्रौद्योगिकी संस्थान में शिक्षकों के वित्तीय मामलों को लेकर उठे सवालों का जवाब फाइलों, नियमों और पारदर्शी जांच के आधार पर मिलना चाहिए। काली पट्टी बांधकर किया गया विरोध इस बात का संकेत है कि विवाद अब दबा हुआ प्रशासनिक मामला नहीं रह गया है।

अन्य समाचार